लखनऊ , अक्टूबर 26 -- उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) की तैयारियों के मद्देनजर निर्वाचन अधिकारियों को मतदाता सूची में गड़बड़ी और लापरवाही के मामलों में सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। मंडलायुक्तों को रोल प्रेक्षक के रूप में अपने मंडल के जिलों में मतदाता सूची संबंधी कार्यों का सघन पर्यवेक्षण करने तथा जिला निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस संबंध में 24 अक्टूबर को मंडलायुक्तों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (एईआरओ) और कम्प्यूटर सहायकों के साथ वर्चुअल बैठक की गई थी जिसमें मतदाता सूची तैयार करने में निर्धारित प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करने तथा पूर्व में सामने आई त्रुटियों की पुनरावृत्ति रोकने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 का अध्ययन करने को कहा गया। निर्देश दिया गया कि सभी अधिकारी ईआरओनेट की अपनी लॉगिन आईडी और पासवर्ड किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा न करें।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की समाप्ति तिथि 10 अप्रैल, 2026 से अब तक कम्प्यूटर सहायकों द्वारा फीड किए गए फार्म-6, फार्म-7 और फार्म-8 की अनिवार्य रूप से जांच कराई जाए, ताकि पीलीभीत जैसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो। इस अवधि में कम्प्यूटर सहायकों द्वारा फीड किए गए सभी संबंधित फार्मों की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
भौतिक रूप से प्राप्त आवेदन फार्मों की फीडिंग कम्प्यूटर सहायकों से नहीं कराने को कहा गया है। ऐसे सभी फार्म बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा बीएलओ ऐप के माध्यम से ही डिजिटाइज किए जाएंगे। साथ ही, भौतिक रूप से प्राप्त सभी फार्मों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्देशों के अनुसार, यदि मतदाता सूची में अनियमितता का मामला सामने आता है तो संबंधित ईआरओ, एईआरओ और कम्प्यूटर सहायक को जिम्मेदार मानते हुए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 32 के तहत कार्रवाई की जाएगी। जिला निर्वाचन अधिकारी के स्तर पर पर्यवेक्षण में शिथिलता पाए जाने पर उनकी जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। मंडलायुक्तों को भी रोल प्रेक्षक के रूप में अपने-अपने मंडलों में नियमित और सघन निगरानी करने को कहा गया है।
ईआरओ को लंबित फार्म-6, फार्म-7 और फार्म-8 की प्रतिदिन समीक्षा कर उनका नियमानुसार और तत्परता से निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। मतदाता सूची से संबंधित एनजीएसपी, पीजीआरएस, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से 10 अप्रैल से अब तक प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने को भी कहा गया।
बैठक में बुलंदशहर, सीतापुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ के जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा सोशल मीडिया पर प्रसारित दोहरे मतदाताओं से संबंधित शिकायतों पर समय से रिपोर्ट नहीं भेजने पर नाराजगी जताई गई। संबंधित अधिकारियों को शीघ्र आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों को ईसीआईनेट का प्रशिक्षण भी दिया गया। इसके तहत जिला निर्वाचन अधिकारी, ईआरओ और एईआरओ को डैशबोर्ड पर उपलब्ध जानकारियों तथा संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई। सभी अधिकारियों को पोर्टल पर सीयूजी नंबर के स्थान पर निजी मोबाइल नंबर अपडेट करने और पासवर्ड नीति के तहत तत्काल पासवर्ड बदलने के निर्देश दिए गए, ताकि बीएसएनएल नेटवर्क बाधित होने पर काम प्रभावित न हो।
ईसीआईनेट ऐप और मतदाता सेवा पोर्टल पर उपलब्ध 'बुक ए कॉल विद बीएलओ' सुविधा के तहत नागरिकों की कॉल रिक्वेस्ट 48 घंटे से अधिक समय तक लंबित नहीं रखने को कहा गया। बीएलओ द्वारा मतदाताओं से संपर्क किए बिना ही उन्हें 'अनअवेलेबल' चिह्नित करने या कॉल रिक्वेस्ट का समय से जवाब नहीं देने की शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
24 अक्टूबर को आयोजित विशेष अभियान दिवस के दौरान बीएलओ के समय से बूथ पर नहीं पहुंचने और अनुपस्थित रहने संबंधी शिकायतों की भी समीक्षा की गई। संबंधित अनुपस्थित बीएलओ के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को आगाह किया गया कि आगामी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान आयोजित अभियान दिवसों में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में आगामी एसएसआर के तहत प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची से पहले सभी दोहरी प्रविष्टियों को हटाने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए, ताकि ड्राफ्ट मतदाता सूची में दोहरे नाम शामिल न रहें।
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