भोपाल , सितंबर 24 -- मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार को कहा कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है। उन्होंने कहा कि 28 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ता भोपाल में राज्य निर्वाचन आयोग का घेराव करेंगे और 29 सितंबर को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर कलेक्टर कार्यालयों का घेराव किया जाएगा।

श्री पटवारी ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पिछले करीब दो वर्षों से लोकतंत्र, मतदाता के अधिकार और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में गड़बड़ी या किसी वास्तविक मतदाता का नाम हटने का सीधा असर उसके मताधिकार पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों एवं सवालों को सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी राजनीतिक दल का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक मतदाता के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास से जुड़ा मुद्दा है।

उन्होंने मध्यप्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस जानना चाहती है कि कितने मतदाताओं के नाम किन कारणों से हटाए गए, कितने मतदाता स्थानांतरित हुए, कितनों की मृत्यु हुई और कितने नाम डुप्लीकेट पाए गए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, एसआईआर से पहले प्रदेश में 5,74,06,143 मतदाता थे। प्रारूप सूची में यह संख्या घटकर 5,31,31,983 रह गई थी, जबकि अंतिम सूची में 5,39,81,065 मतदाता दर्ज किए गए। अंतिम सूची में 34,25,078 नाम हटाए गए और प्रारूप सूची की तुलना में 8,49,082 मतदाताओं की शुद्ध वृद्धि हुई। आयोग के अनुसार नाम हटाने के कारणों में अनुपस्थिति, मृत्यु, स्थानांतरण और डुप्लीकेट प्रविष्टियां शामिल थीं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी की मांग है कि प्रारूप और अंतिम मतदाता सूची के बीच हुए बदलावों का विधानसभा क्षेत्रवार और बूथवार पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। प्रत्येक मतदाता को यह जानने का अधिकार है कि उसका नाम मतदाता सूची में है या नहीं और यदि नाम हटाया गया है तो उसका कारण क्या है। उन्होंने कहा कि नए मतदाता के पंजीयन के लिए फॉर्म-6 तथा मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 की व्यवस्था है। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव संबंधी किसी भी फॉर्म या प्रक्रिया में बदलाव किया गया है तो उसकी जानकारी, कानूनी आधार और पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जानी चाहिए।

श्री पटवारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग की स्वतंत्रता तथा उसकी विश्वसनीयता को लेकर गंभीर चिंताएं उठा रही है। चुनाव आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है और श्री कुमार ने 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था। उन्होंने 2023 में बने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी कानून का भी उल्लेख किया। कानून के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक मंत्री को शामिल किया गया है।

श्री पटवारी ने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की ऐसी व्यवस्था हो, जिसमें किसी राजनीतिक दल के प्रभाव की आशंका न्यूनतम हो और जनता का विश्वास मजबूत हो।

उन्होंने जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और प्रशासनिक अधिकारियों से संविधान एवं कानून के अनुरूप निष्पक्ष भूमिका निभाने की अपील की। श्री पटवारी ने कहा कि यदि किसी अधिकारी पर पक्षपात या किसी राजनीतिक दल को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप सामने आता है तो कांग्रेस कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से उसका विरोध करेगी।

कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पार्टी ने कहा है कि जांच में आपराधिक कृत्य प्रमाणित होने पर प्राथमिकी दर्ज की जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो। साथ ही, मतदाता सूची से हटाए गए वास्तविक मतदाताओं को अपना पक्ष रखने तथा नाम पुनः जुड़वाने का अवसर देने और चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने की मांग की गई है।

श्री पटवारी ने कहा कि आगामी दिनों में कांग्रेस गांव-गांव और बूथ-बूथ जाकर मतदाता सूची की स्थिति की जानकारी लेगी। कार्यकर्ता यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची में मौजूद रहें तथा जिन लोगों को किसी कारण से परेशानी हुई है, उन्हें नियमानुसार शिकायत और अपील का अवसर मिले।

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