इम्फाल , मार्च 05 -- मणिपुर का जीवंत पांच दिवसीय त्योहार 'याओसांग' इस समय पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है और गुरुवार को श्रद्धालुओं तथा आम लोगों ने वसंत ऋतु के इस पारंपरिक त्योहार के तीसरे दिन इसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।
होली के समय ही मनाये जाने वाले इस त्योहार की मुख्य पहचान पारंपरिक खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और भक्ति गतिविधियां हैं। इसमें बच्चों और युवाओं का 'नाकाथेन्ग' (चंदा मांगना) और रात के समय चांदनी रात में प्रसिद्ध नृत्य 'थाबल चोंगबा' आकर्षण का केंद्र हैं।
लोग सुबह से ही राज्य के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक अनुष्ठानों और उत्सवों में भाग लेने के लिए स्थानीय मंदिरों और सामुदायिक मैदानों में उमड़ पड़े। युवा रंगों और पानी से खेलते नजर आए, वहीं स्थानीय क्लबों और याओसांग समितियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों और खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया।
'याओसांग खेलकूद' प्रतियोगिता में बच्चों और युवाओं ने दौड़, फुटबॉल, रस्साकशी और अन्य पारंपरिक खेलों में भाग लिया। विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और शाम को होने वाले 'थाबल चोंगबा' नृत्य कार्यक्रमों में लोगों की भारी भीड़ जुट रही है।
मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने इस मौके पर मणिपुर के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि याओसांग मणिपुर के सबसे प्रिय त्योहारों में से एक है और यह समुदायों के बीच खुशी, एकता और एकजुटता का प्रतीक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह त्योहार लोगों के बीच सद्भाव, शांति और भाईचारे को मजबूत करेगा और हर घर में सुख-समृद्धि लाएगा।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने भी इस अवसर पर मणिपुर की जनता को बधाई दी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि याओसांग न केवल एक धार्मिक त्योहार है, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव भी है, जो हर आयु के लोगों के बीच एकता, खेल भावना और सामाजिक मेलजोल को बढ़ावा देता है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपनी समृद्ध परंपराओं और मूल्यों को सहेजते हुए आपसी सम्मान और सद्भाव के साथ इस त्योहार को मनाएं।
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