इम्फाल , मार्च 11 -- मणिपुर में जनगणना से पहले उचित एनआरसी की मांग को लेकर बुधवार को रैली निकाल रहे सैकड़ों लोगों पर सुरक्षाकर्मियों की फायरिंग में ख्वैरमबंद कीथेल में सात लोग घायल हो गये।
'जस्ट एंड फेयर डिलिमिटेशन' (जेएफडी) की ओर से आयोजित मार्च 'एनआरसी नहीं, तो जनगणना नहीं', 'पहले वर्तमान संकट सुलझाओ, जनगणना बाद में' आदि नारे लगाते हुए विधानसभा की ओर बढ़ रही थी। जारी विधानसभा सत्र के कारण क्षेत्र में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गयी है।
पुलिस और मणिपुर त्वरित प्रतिक्रिया बल (एमआरएटीएफ) ने प्रदर्शनकारियों को ख्वैरमबंद कीथेल के मुख्य बाजार क्षेत्र के पास रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं माने। पुलिस और एमआरएटीएफ को आंसू गैस के गोले और मॉक बम दागने पड़े, जिसमें छह महिलाएं और एक व्यक्ति घायल हो गया।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि सरकार को मणिपुर में आये अवैध प्रवासियों की पहचान करनी चाहिए। मणिपुर में प्रवेश करने वाले हजारों लोगों की जांच के लिए कोई तंत्र नहीं है और यदि एनआरसी नहीं किया गया, तो वे सभी भारतीय नागरिक बन जाएंगे और राज्य में समस्या पैदा करेंगे।
सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस विधायक दल के नेता के. मेघचंद्र ने कहा कि जनगणना की गतिविधियां जल्द ही शुरू होने वाली हैं। उन्होंने कहा कि हजारों परिवार राहत शिविरों में रह रहे हैं और अवैध अप्रवास की खबरें आई हैं, इसलिए जनगणना का काम प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत को देखते हुए लोग चाहते हैं कि जनगणना को स्थगित कर दिया जाए।
श्री मेघचंद्र ने कहा कि इस साल अप्रैल से सितंबर तक के जनगणना कार्यक्रम के अनुसार आवास गणना का पहला चरण पूरा किया जाना है, जो मौजूदा संकट के कारण मणिपुर में संभव नहीं है। उन्होंने आगाह किया कि जनगणना में स्व-गणना का विकल्प है, जिसका दुरुपयोग किया जा सकता है। उन्होंने सूचित किया कि 2027 में जनगणना का दूसरा चरण भी संभव नहीं होगा क्योंकि संकट के कारण विभिन्न समुदायों के लोग स्वतंत्र रूप से आवाजाही नहीं कर पा रहे हैं।
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