लखनऊ , जनवरी 29 -- जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (केजीएमयू), लखनऊ से सटे ऐतिहासिक दरगाहों से जुड़ी हालिया कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई है।

उन्होंने हज़रत हाजी हरमैन शाहؒ के आस्ताने में की गई तोड़फोड़ तथा हज़रत मखदूम शाह मीनाؒ परिसर में स्थित पाँच सौ वर्ष से अधिक पुराने मज़ारों के विरुद्ध जारी ध्वस्तीकरण नोटिसों को धार्मिक एवं संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। एक दिन पूर्व जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सोशल मीडिया पेज पर शेयर करते हुए मौलाना मदनी ने कॉलेज प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि वह भ्रामक प्रचार के सहारे वक्फ संपत्तियों से जुड़े कानूनों का उल्लंघन न करे और जारी नोटिस तत्काल वापस ले।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केजीएमयू से सटे ये मज़ार लगभग सात सौ वर्ष पुराने हैं, जबकि कॉलेज की स्थापना 1912 में हुई थी। उन्होंने कहा कि यह दावा करना कि दरगाहें कॉलेज परिसर में अवैध रूप से मौजूद हैं, सरासर भ्रामक है। स्थापना के समय ही राजस्व विभाग द्वारा दरगाह की भूमि का अलग सीमांकन कर दिया गया था।

दरअसल, बीते दिनों परिसर में स्थापित मजारों को लेकर केजीएमयू प्रशासन ने नोटिस जारी कर उन्हें हटाने का निर्देश जारी किया था। मौलाना मदनी का बयान उसी प्रतिक्रिया का हिस्सा है। जमीयत अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि 26 अप्रैल 2025 को हज़रत हाजी हरमैन शाहؒ के आस्ताने में वुज़ूख़ाना, इबादतगाह तथा ज़ायरीनों की सुविधाओं को बिना किसी न्यायालयी आदेश या वैधानिक अनुमति के ध्वस्त किया गया, जो पूरी तरह गैर-कानूनी है।

उन्होंने कहा कि संबंधित भूमि वक्फ अधिनियम 1995 के तहत विधिवत वक्फ संपत्ति है और सुन्नी वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है। कानून के अनुसार वक्फ संपत्तियों से जुड़े किसी भी विवाद पर निर्णय लेने का अधिकार केवल सक्षम न्यायालय को है, न कि किसी शैक्षणिक संस्था या उसके अधिकारियों को।

मौलाना मदनी ने वक्फ बोर्ड से भी सक्रिय भूमिका निभाने की मांग करते हुए कहा कि प्राचीन मज़ारों और धार्मिक स्थलों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, जिन हिस्सों को ध्वस्त किया गया है उनकी पुनर्बहाली कराई जाए तथा मुतवल्लियों को आवश्यक कानूनी दस्तावेज़ उपलब्ध कराए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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