भीलवाड़ा , मई 14 -- राजस्थान में भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायत शक्करगढ़ में मनरेगा कार्य बंद होने और लंबे समय से मजदूरी नहीं मिलने से परेशान ग्रामीण महिलाओं का गुरुवार को गुस्सा फूट पड़ा।

अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर बड़ी संख्या में श्रमिक महिलाएं पंचायत भवन पहुंची, लेकिन वहां कनिष्ठ लिपिक (मनरेगा सचिव) के नदारद मिलने पर नाराज महिलाएं पंचायत कार्यालय के बाहर ही धरने पर बैठ गईं और प्रशासन के खिलाफ गहरा विरोध जताया।

पीड़ित महिलाओं ने बताया कि गांव में पिछले लंबे समय से मनरेगा के कार्य पूरी तरह से बंद पड़े हैं, जिसके कारण उन्हें मजदूरी नहीं मिल पा रही है। इससे उनके सामने परिवार चलाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मजदूरी भुगतान, नए जॉब कार्ड बनवाने और मनरेगा से जुड़े अन्य जरूरी कार्यों को लेकर वे पिछले कई दिनों से लगातार ग्राम पंचायत के चक्कर काट रही हैं, लेकिन जिम्मेदार कर्मचारियों के समय पर कार्यालय नहीं आने से उनके सभी काम अटके हुए हैं।

ग्रामीण महिलाओं ने पंचायत प्रशासन पर अनदेखी का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है, जिससे उनके सामने आर्थिक तंगी के साथ-साथ मानसिक परेशानी भी लगातार बढ़ती जा रही है।

पंचायत भवन के बाहर एकत्रित हुई महिलाओं ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि शक्करगढ़ ग्राम पंचायत में संबंधित जिम्मेदार कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, गांव में बंद पड़े मनरेगा कार्यों को तुरंत प्रभाव से दोबारा शुरू कराया जाए और श्रमिकों के सभी लंबित कार्यों का जल्द से जल्द समाधान कर राहत प्रदान की जाए।

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