चेन्नई , जून 15 -- तमिलनाडु और पुडुचेरी के पूर्वी तट पर यंत्रीकृत ट्रॉलरों के गहरे समुद्र में मछली पकड़ने पर लगा 61 दिनों का प्रतिबंध रविवार आधी रात समाप्त हो गया। इसके साथ ही तटीय जिलों के मछुआरों ने अच्छी पकड़ की उम्मीद में समुद्र में उतरकर अपनी व्यावसायिक गतिविधियां फिर से शुरू कर दी हैं।

जश्न और आतिशबाजी के बीच, जिससे आधी रात को आसमान रोशनी से नहा उठा, मछुआरे जिला मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों से टोकन लेने के बाद अपने मरम्मत किये गये यंत्रीकृत ट्रॉलरों के साथ समुद्र में उतर गये।

पूर्वी तट के तटीय जिलों थूथुकुडी, कन्याकुमारी, रामनाथपुरम के रामेश्वरम, पुदुक्कोट्टई और नागपट्टिनम के मछुआरे 61 दिनों के बाद समुद्र में उतरे हैं।

समुद्री संसाधनों की रक्षा करने और मछलियों के प्रजनन (ब्रीडिंग) के लिए हर वर्ष लगाया जाने वाला यह मौसमी प्रतिबंध यंत्रीकृत नौकाओं के संचालन को अस्थायी रूप से रोक देता है।

इस अवधि के दौरान, मछुआरे आजीविका के लिए आय के वैकल्पिक स्रोतों और सरकारी सहायता पर निर्भर थे। इसलिए इस प्रतिबंध की समाप्ति को विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर मछुआरों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जो समुद्र में लौटने का इंतजार कर रहे थे।

14 अप्रैल की आधी रात से शुरू हुए इस प्रतिबंध के दौरान, मछलियों की आवक कम होने के कारण उनके दाम काफी बढ़ गये थे।

राज्य के 13 तटीय जिलों में लगभग 6,000 यंत्रीकृत नावें इस प्रतिबंध की अवधि के दौरान समुद्र में नहीं उतरीं, क्योंकि किसी भी उल्लंघन पर तमिलनाडु समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम, 1983 की धारा पांच के तहत जुर्माने का प्रावधान है।

केन्द्र सरकार के गहरे समुद्र में मछली पकड़ने का विनियमन अधिनियम, 2001' के प्रावधानों के तहत राज्य सरकार ने उत्तर में तिरुवल्लूर जिले से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी जिले तक यह प्रतिबंध लागू किया था। इस क्षेत्र में मछलियों के प्रजनन को सुगम बनाने और समुद्री पारिस्थितिकी में मत्स्य भंडार के संरक्षण के लिए यह प्रतिबंध 14 जून की आधी रात तक प्रभावी रहना था।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा, "हालांकि, कटामरन (पारंपरिक नावें), बिना मोटर वाली देशी नावें और फाइबर से बनी नावें मछली पकड़ने जा सकती थीं, क्योंकि वे केवल तीन या चार नॉटिकल माइल्स तक ही जा सकती हैं।" सूत्रों ने यह भी बताया कि प्रतिबंध की अवधि के दौरान लगभग 1.20 लाख समुद्री मछुआरा परिवारों को 8,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जायेगी।

चूंकि प्रतिबंध की अवधि विधानसभा चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में शुरू हुई थी, इसलिए विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस सहायता राशि को बढ़ाकर 10,000 से 12,000 रुपये करने का वादा किया है और मछुआरा समुदाय के लिए कई तरह के उपायों की घोषणा भी की है।

तमिलनाडु समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम, 1983 के तहत प्रजनन सत्र के दौरान 'प्रजातियों के प्रसार के संरक्षण' के लिए यह प्रतिबंध लागू किया गया था।

अधिकारियों ने यंत्रीकृत नावों के मछुआरों को समुद्र में न उतरने के निर्देश दिये थे, ताकि प्रजनन सत्र के दौरान ट्रॉलरों के कारण समुद्री जीवों को होने वाली परेशानी से बचाया जा सके।

मछुआरों ने प्रतिबंध की इस अवधि का उपयोग अपने जालों की मरम्मत करने और अपनी नावों के रख-रखाव के काम के लिए किया। प्रतिबंध की अवधि के दौरान इंजनों की मरम्मत, ड्राई डॉकिंग, बढ़ईगिरी और नावों की पेंटिंग का काम किया जाता है, जिसके लिए नाव मालिक प्रत्येक वर्ष लगभग दो लाख से पांच लाख रुपये खर्च करते हैं।

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