केंद्रपाड़ा , अगस्त 01 -- खारे पानी के मगरमच्छों के प्रजनन काल के दौरान और उनके अपने अंडे रखने के लिए जगह बनाने की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए तीन महीने बंद रहने के बाद ओडिशा में भीतरकणिका राष्ट्रीय उद्यान पर्यटकों के लिए शनिवार को फिर से खोल दिया गया।

वन अधिकारियों ने प्रवेश द्वार परगुलदस्ते और मिठाइयां देकर पर्यटकों का स्वागत किया।

राजनगर मैंग्रोव वन प्रभाग ने खारे पानी के मगरमच्छों द्वारा अपने अंडे रखने के लिए जगह बनाने की प्रक्रिया और प्रजनन काल के दौरान मानव-मगरमच्छ संघर्ष के जोखिम को कम करने के लिए गत एक मई से 31 जुलाई तक पर्यटकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। प्रजनन काल की अवधि में मगरमच्छ काफी ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं।

प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) वरदराज गांवकर ने बताया कि इस वर्ष किये गये गहन सर्वेक्षणों में उद्यान के जल निकायों और उससे सटी नदियों में मगरमच्छों के 117 अंडे रखने की जगह दर्ज की गयीं।

श्री गांवकर ने कहा, "यह अस्थायी रोक मगरमच्छों के प्रजनन और अंडे रखने की जगह बनाने के लिए एक सुरक्षित और बाधा-रहित वातावरण प्रदान करती है।"आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पहले दिन पर्यटकों की संख्या कम रही, क्योंकि केंद्रपाड़ा जिले के कई हिस्से हाल ही में आयी बाढ़ से प्रभावित हैं।

उद्यान अधिकारियों ने आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कई नए आकर्षण शुरू किये हैं। इनमें सेल्फी प्वाइंट, बोट लाइब्रेरी, मैंग्रोव नर्सरी, कणिका कैफे, मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र का मनोरम दृश्य प्रस्तुत करने वाला 600 मीटर लंबा लकड़ी का कैनोपी वॉकवे और पर्यटकों के लिए फाइबर बोट सेवाएं शामिल हैं। अपनी पर्यावरण-अनुकूल पहल के तहत, वन विभाग ने उद्यान के अंदर शराब, पॉलिथीन और प्लास्टिक की थैलियों पर सख्त प्रतिबंध लागू किया है। प्लास्टिक की पानी की बोतलें ले जाने वाले आगंतुकों को प्रवेश द्वार पर 50 रुपये की वापसी योग्य सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। खाली बोतल वापस लाने पर यह धनराशि लौटा दी जायेगी।

वन अधिकारियों ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित गाइड तैनात किये गये हैं कि राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण करते समय पर्यटक सुरक्षा नियमों और संरक्षण दिशानिर्देशों का पालन करें।

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