नयी दिल्ली , जनवरी 22 -- गणतंत्र दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्रालय के तत्वाधान में आयोजित 'भारत पर्व' में बिहार अपने प्रसिद्ध मखाने पर केंद्रित झांकी प्रस्तुत कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि 23 से 31 जनवरी तक लाल किले में आयोजित होने वाले इस पर्व में देश भर की विविधताओं को झांकियों के माध्यम से जनता के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। यह पर्व राज्यों की विशिष्ट पहचान, परंपरागत ज्ञान, आजीविका के स्रोत और आधुनिक विकास की यात्रा को जोड़ने वाला एक राष्ट्रीय मंच है।
इसी मंच पर बिहार 'मखाना: लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड' के नाम से अपनी झांकी प्रस्तुत कर रहा है। यह नाम बिहार के सफेद सोना यानी मखाने के मिथिलांचल से बाहर निकलकर वैश्विक स्तर पर एक 'सुपरफूड' के रूप में पहचान बनाने की कहानी को सहज ही धारण करता है।
फॉक्स नट या कमल बीज के नाम से भी जाने जाने वाले मखाने की अधिकांश वैश्विक आपूर्ति भारत द्वारा की जाती है, जिसमें से बिहार की हिस्सेदारी 85 से 90 प्रतिशत है। मिथिला मखाना को वर्ष 2022 में जीआई टैग भी प्राप्त हुआ था, जिसने इसे वैश्विक बाजार में विशिष्ट पहचान दी है।
बिहार की ओर से प्रस्तुत की जाने वाली यह झांकी मखाने की यात्रा को दो भागों में दर्शाती है। ट्रैक्टर वाले हिस्से में कमल के पत्ते के बीच उभरा हुआ सफेद 'लावा मखाना' दिखाया गया है और आगे जीआई टैग का प्रतीक प्रदर्शित किया गया है, जिसे मिथिला पेंटिंग के बॉर्डर से सजाया गया है।
ट्रेलर वाले हिस्से में मखाना की कटाई, बीज संग्रह, ग्रेडिंग, भुनाई, फोड़ने की प्रकिया, पैकिंग और गुणवत्ता जांच की पूरी प्रक्रिया को दर्शाया गया है। इसमें मिट्टी के चूल्हे पर लोहे की कढ़ाही में मखाना भूनती महिला और लकड़ी के मूसल से मखाना फोड़ते पुरुष की जीवंत आकृतियां प्रस्तुत की गयी हैं।
गौरतलब है कि केंद्रीय बजट 2025-26 में मखाना किसानों के लिए बिहार में एक राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा की गयी है। साथ ही मखाना के उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्द्धन और विपणन को मजबूत करते हुए किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए लगभग 475 करोड़ रूपये के पैकेज की भी घोषणा की गयी है।
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