पटना , सितंबर 07 -- बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सोमवार को कहा कि मखाना राज्य का गौरव और सांस्कृतिक पहचान है और राज्य सरकार का लक्ष्य मखाना की खेती को पारंपरिक पद्धति से आगे बढ़ाकर आधुनिक और व्यावसायिक मॉडल के रूप में विकसित करना है।

श्री सिन्हा ने कहा कि किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे बिहार का मखाना दुनिया के हर कोने तक पहुंचे और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

कृषि मंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजार में 'सुपरफूड' के रूप में पहचान बना चुके मखाना के कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत से अधिक है। मिथिला मखाना को वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से कृषि विभाग का उद्यान निदेशालय वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीज, आधुनिक प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को बढ़ावा दे रहा है। इसी उद्देश्य से 'मखाना विकास योजना' को व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत राज्य के 21 मखाना उत्पादक जिलों में वैज्ञानिक पद्धति से उत्पादन और आधुनिक प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए विशेष अनुदान दिया जा रहा है। इन जिलों में दरभंगा, मधुबनी, कटिहार, पूर्णिया, सहरसा, सुपौल, किशनगंज, सीतामढ़ी, मधेपुरा, अररिया, खगड़िया, समस्तीपुर, भागलपुर, सारण, सीवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली और पटना शामिल हैं।

श्री सिन्हा ने कहा कि मखाना की खेती के विस्तार और आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से लागत का 75 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष अनुदान दिया जा रहा है। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र विस्तार और उन्नत बीज वितरण के तहत पारंपरिक तालाब प्रणाली के साथ-साथ खेत प्रणाली में भी मखाना उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों को अधिक उपज देने वाली उन्नत प्रजातियों 'सबौर मखाना-1' और 'स्वर्ण वैदेही' के गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

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