पटना, अक्टूबर 24 -- बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी प्रखंड के इंजीनियर नाज ओजैर ने मक्के के बेकार समझे जाने वाले छिलके से कप, प्लेट,, कटोरी, ग्लास और स्ट्रॉ समेत कई पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद तैयार करने की तकनीक विकसित की है।प्लास्टिक के बढ़ते प्रदूषण और खानपान में माइक्रोप्लास्टिक के खतरों से निपटने के लिए मुजफ्फरपुर के कुढ़नी प्रखंड के एक इंजीनियर ने अनोखा विकल्प पेश किया है। प्रखंड के छितरौली पंचायत अंतर्गत मुरादपुर निवासी इंजीनियर नाज ओजैर ने मक्के के बेकार समझे जाने वाले छिलके से चाय के कप, प्लेट, कटोरी, ग्लास, स्ट्रॉ और झोला जैसे पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद तैयार कर सिंगल यूज प्लास्टिक का मजबूत विकल्प खोज निकाला है।

उनके वर्षों की कड़ी मेहनत से मिले इस नवाचार को केंद्र सरकार से पेटेंट भी हासिल हो चुका है। इसके बल पर उन्होंने एमएनओ स्वदेशी इंडिया प्रा. लि. नाम से अपना स्टार्टअप शुरू किया है। उनकी यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में मददगार साबित हो रही है, बल्कि स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को रोजगार देने का जरिया भी बन गई है।

इंजीनियर नाज ने बताया कि सफलता का सफर आसान नहीं था। प्लास्टिक बर्तनों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को देखते हुए उन्होंने करीब पांच वर्षों तक बांस, केला और पपीते के रेशों पर शोध किया। इसके बाद उन्होंने मक्के के छिलके पर काम शुरू किया और उसे एक निश्चित तापमान पर गर्म करके ढालने की तकनीक खोजी।अपने इस प्रयोग में उन्होंने पाया कि एक बार आकार में ढल जाने के बाद मक्के के छिलके के बर्तन अपना आकार नहीं बदलते। इस तकनीक के लिए उन्होंने 1 मार्च 2019 को पेटेंट का आवेदन किया था, जिसके बाद 21 फरवरी 2024 को उन्हें आधिकारिक पेटेंट प्रमाण पत्र हासिल हुआ। पेटेंट मिलने के बाद 26 मई 2026 को उन्होंने अपने स्टार्टअप की स्थापना की और उत्पादन शुरू किया।

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