भोपाल , अक्टूबर 15 -- मध्यप्रदेश में सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने और फसलें नष्ट किए जाने के विरोध में खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों के आदिवासी भोपाल के लिए पदयात्रा कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के आज भोपाल पहुंचने की संभावना है। वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलकर अपनी मांगें रखने और जमीन से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं।

आंदोलनकारियों के अनुसार, 11 अक्टूबर को वन विभाग की कार्रवाई में कोसमी गांव के 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े गए और एक कुएं को मिट्टी से भर दिया गया। इसके बाद गांव में तीन दिन तक धरना दिया गया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे रमेश बारेला ने कहा कि प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए अब 35 से अधिक गांवों के लोग एकजुट हुए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी प्रभावित परिवारों से मिलकर कार्रवाई पर आपत्ति जता चुके हैं।

आदिवासियों ने बेदखली और तोड़फोड़ के लिए जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई, पीढ़ियों से खेती की जा रही जमीन के पट्टे, बेघर हुए परिवारों के पुनर्वास और नष्ट हुई फसलों के मुआवजे की मांग की है। उनका आरोप है कि खिवनी क्षेत्र के कई गांवों में खेती करने से रोका जा रहा है। विदिशा जिले के ग्यारसपुर, लटेरी, सिरोंज और शमशाबाद क्षेत्रों से भी बेदखली तथा फसलें नष्ट किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

दूसरी ओर, वन विकास निगम और सीहोर जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में संबंधित जमीन पर कब्जे को अवैध बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 में वन विकास निगम ने 135 हेक्टेयर क्षेत्र में 3.37 लाख से अधिक सागौन के पौधे लगाए थे। आरोप है कि इनमें से 78,700 पौधे काटकर करीब 31.48 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि पर अतिक्रमण किया गया। प्रशासन ने गूगल अर्थ की समयरेखा और ड्रोन से बनाए गए वीडियो को भी साक्ष्य बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2021 तक भूमि खाली थी और वर्ष 2022 से वहां झोपड़ियां बनाकर खेती शुरू की गई।

आदिवासी संगठन प्रशासन की रिपोर्ट से असहमत हैं और अपने दस्तावेजों के आधार पर मुख्यमंत्री के समक्ष पक्ष रखने की बात कह रहे हैं। मामले को लेकर प्रभावित परिवारों और प्रशासन के बीच विवाद जारी है।

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