नयी दिल्ली , सितंबर 24 -- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने गुरुवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, (आईआईटी) बंबई में छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में मौके पर जाकर विस्तृत जांच की।

श्री वाकोडे अनुसूचित जाति के छात्र थे और एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में बी. टेक के दूसरे वर्ष में पढ़ रहे थे।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार आयोग का यह दौरा मृतक के परिवार द्वारा जाति के आधार पर भेदभाव, प्रताड़ना और उसकी मौत से पहले के हालात के बारे में लगाये गये आरोपों को देखते हुए किया गया था। इस मामले की जांच अभी मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच कर रही है। आयोग इस मामले की जांच अनुसूचित जातियों के सदस्यों के लिए उपलब्ध संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों के दायरे में कर रहा है।

इस दौरे के दौरान श्री मकवाना ने मुम्बई के वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें निदेशक, उप निदेशक, रजिस्ट्रार, संबंधित फैकल्टी सदस्य और संस्थान के दूसरे अधिकारियों के साथ विस्तार से बातचीत की। आयोग छात्र की मौत से पहले की घटनाओं का पूरा ब्यौरा मांगा, जिसमें 18 सितंबर को मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान हुई घटना भी शामिल है। इस घटना में छात्र कथित तौर पर अकादमिक गड़बड़ी में शामिल पाया गया था।

आयोग ने उन हालात की जांच की जिनमें परीक्षा के दौरान छात्र से पूछताछ की गयी, उसके बाद कथित तौर पर अपनायी गयी प्रक्रिया, संबंधित फैकल्टी और संस्थान अधिकारियों की भूमिका और छात्र की शिकायतों को दूर करने और अनुसूचित जातियों के छात्रों के कल्याण और अधिकारों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध सांस्थानिक प्रणाली की जांच की।

श्री मकवाना ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मामले से जुड़े सभी जरूरी रिकॉर्ड और सामान, जिनमें सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक सबूत, आधिकारिक बातचीत, परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड और दूसरी डॉक्यूमेंट्री चीज़ें शामिल हैं, उन्हें संभालकर रखा जाना चाहिए और कानून के मुताबिक जांच करने वाली एजेंसी को दिया जाना चाहिए, ताकि सबूतों के आधार पर छात्र की मौत के हालात का पता लगाया जा सके।

मौके पर जांच के हिस्से के तौर पर, श्री मकवाना खुद एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट गये, जहां श्री वाकोडे पढ़ाई कर रहे थे। अध्यक्ष ने उस क्लासरूम/परीक्षा हॉल की भी जांच की, जहां बताई गयी परीक्षा की घटना हुई थी और परीक्षा के दौरान और उसके तुरंत बाद की घटनाओं के बारे में जानकारी मांगी।

इसके बाद आयोग ने हॉस्टल की जगह और उस कमरे का दौरा किया जिसमें श्री वाकोडे रहता था। श्री मकवाना ने श्री वाकोडे के सहपाठियों और साथी छात्रों से भी बातचीत की ताकि उनके अकादमिक और कैंपस के अनुभव को समझा जा सके और उनकी मौत से पहले के हालात और घटनाओं के बारे में जानकारी हासिल की जा सके। आयोग आधिकारिक रिकॉर्ड और चल रही जांच के नतीजों के साथ ऐसे इनपुट पर भी विचार करना चाहता है।

इसके बाद श्री मकवाना ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिनमें पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त और जांच से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे, जिसमें अपराध शाखा के अधिकारी भी शामिल थे।

अध्यक्ष ने जांच अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि जांच निष्पक्ष, बिना किसी भेदभाव के पूरी और तेज़ी से हो, और हर जरूरी आरोप और हालात की जांच मौजूद सबूतों के आधार पर और कानून के मुताबिक सख्ती से की जाये।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जल्द से जल्द आयाेग को एक विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट एवं जांच रिपोर्ट दें, ताकि आयोग उसकी आगे की जांच कर सके।

बाद में श्री मकवाना ने श्री वाकोडे के माता-पिता और परिवार के दूसरे सदस्यों से मुलाकात की और उनकी शिकायतों और चिंताओं को विस्तार से सुना। परिवार ने छात्र की मौत से पहले के हालात के बारे में अपने आरोप आयोग के सामने रखे और आयोग से सही दखल की मांग करते हुए एक लिखित शिकायत दी।

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