मऊ , जुलाई 11 -- उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में सीजन की पहली मानसूनी बरसात ने किसानों के चेहरे खिला दिए हैं। बीती रात से शुरू हुई रिमझिम बारिश ने लंबे समय से बने सूखे के हालात को काफी हद तक राहत दी है और खेतों में एक बार फिर चहल-पहल लौट आई है। पूर्वांचल में खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान है, जिसकी खेती के लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है। इस वर्ष जुलाई का पहला सप्ताह बीत जाने के बावजूद जिले में बारिश नहीं हुई थी, जिससे किसान चिंता में थे। धान की रोपाई के लिए तैयार की गई नर्सरी (बेहन) मुरझाने लगी थी और किसानों की उम्मीदें भी कमजोर पड़ने लगी थीं।

किसानों के अनुसार केवल ट्यूबवेल के सहारे खेतों में पानी भरकर धान की रोपाई कर पाना मुश्किल हो रहा था। लगातार सिंचाई के कारण कई स्थानों पर ट्यूबवेलों का जलस्तर भी प्रभावित होने लगा था। ऐसे में मानसून की पहली बारिश किसी राहत से कम नहीं साबित हुई।

बीती रात से हो रही रिमझिम बरसात के बाद खेतों में पर्याप्त नमी और पानी दिखाई देने लगा है। जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में किसान बड़ी संख्या में खेतों में उतर गए हैं और धान की रोपाई का काम तेजी से शुरू हो गया है। कुल मिलाकर मानसून की पहली बारिश ने न केवल खेतों की प्यास बुझाई है, बल्कि किसानों में नई उम्मीद और उत्साह का संचार भी किया है।

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