मऊ , अप्रैल 11 -- उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में स्थित स्थायी लोक अदालत की पीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए एक गरीब दंपति के बच्चे को निजी विद्यालय में प्रवेश दिलाने का आदेश दिया है।
अदरी देहात निवासी रामू चौहान ने अपने बच्चे के दाखिले के लिए बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के तहत आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया में बच्चे का नाम आने के बाद सनबीम स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित हुआ, लेकिन विद्यालय प्रशासन ने दस्तावेज सत्यापन के नाम पर अभिभावक को लगातार टालते हुए बाद में सीट भर जाने का हवाला देकर प्रवेश देने से इंकार कर दिया।
इससे आहत होकर रामू चौहान ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया। मामले को गंभीरता से लेते हुए अध्यक्ष हीरालाल एवं सदस्य विकास भाई निकुम्भ ने दोनों पक्षों को तलब कर मध्यस्थता कराई, जिसमें अंततः बच्चे को प्रवेश देने पर सहमति बन गई।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि देश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने का अधिकार है और उसे इससे वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने निर्देश दिया कि संबंधित विद्यालय बच्चे को कक्षा-3 में प्रवेश दे तथा उसके साथ किसी प्रकार का भेदभाव न किया जाए। सुनवाई के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी कोपागंज मुकेश कुमार, एडीजीसी अमित कुमार सिंह, अधिवक्ता मधुसूदन त्रिपाठी, रामानन्द चौहान तथा विद्यालय की ओर से ज्वाला प्रसाद श्रीवास्तव उपस्थित रहे।
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