रामनगर , मार्च 18 -- उत्तराखंड में नैनीताल जिले के रामनगर स्थित प्रसिद्ध गर्जिया देवी मंदिर में इस बार श्रद्धालु माता के दर्शन नहीं कर पाएंगे, मंदिर में चल रहे जीर्णोद्धार और सुरक्षा कार्य के चलते स्थानीय प्रशासन द्वारा मंदिर को 30 अप्रैल तक श्रद्धालुओं के लिए बंद किया गया है।
मंदिर के पुजारी जीतेन्द्र पांडे ने बताया कि मां गिरिजा देवी के टीले पर इस समय मंदिर के टीले का सुरक्षात्मक कार्य चल रहा है, ऐसे में मुख्य मंदिर तक श्रद्धालुओं की आवाजाही पूरी तरह से बंद कर दी गई है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालु मंदिर परिसर के दूसरे छोर पर स्थित प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर में मां गिरिजा देवी की चरण पादुका के दर्शन कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि 30 अप्रैल के बाद ही टीले पर स्थित मुख्य मंदिर में विधिवत दर्शन शुरू हो सकेंगे। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अजय कुमार जॉन ने बताया कि गर्जिया मंदिर के सुरक्षा कार्य की शुरुआत पहले करीब पांच करोड़ 36 लाख रुपये की लागत से की गई थी। इसके तहत टेंडर प्रक्रिया पूरी कर काम शुरू किया गया लेकिन बाद में रुड़की से आई भुवर्ग टीम द्वारा मंदिर के टीले का सर्वे और मॉडल का अध्ययन किए जाने के बाद कई तकनीकी बदलाव सामने आए। उन्होंने बताया कि इसके बाद आईआईटी रुड़की से सलहकार के माध्यम से विस्तृत मॉडल स्टडी कराई गई, जिसके बाद अनुमानित लागत को संशोधित किया गया जिसके बाद लागत बढ़कर 11 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। इस संशोधित प्रस्ताव को प्रशासन से मंजूरी मिल चुकी है और उसी के अनुसार कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।
श्री जॉन ने बताया कि मंदिर का क्षेत्र बेहद संवेदनशील है। एक ओर नदी बहती है और दूसरी ओर टीले की संरचना काफी कमजोर हो चुकी है, कार्य के दौरान नदी के भीतर करीब पांच मीटर गहराई तक खुदाई करनी पड़ रही है, जहां लगातार पानी का रिसाव हो रहा है, यही कारण है कि कार्य को बेहद सावधानी के साथ किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में फरवरी में भी कुछ दिनों के लिए मंदिर को बंद किया गया था, ताकि कार्य को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके, फिलहाल मंदिर को 10 मार्च से 30 अप्रैल तक मंदिर को पूरी तरह बंद रखा गया है। इस दौरान टीले के नीचे दोनों ओर से दीवारों को जोड़ने, सुरक्षा दीवार बनाने और ऊपर तक सुरक्षित पहुंच के लिए जरूरी निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा हमारा लक्ष्य था कि कार्य जून तक पूरा कर लिया जाए, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए समय विस्तार देना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि मानसून से पहले कार्य को सुरक्षित स्तर तक पहुंचाने के लिए ठेकेदार और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।
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