बेंगलुरु , जुलाई 21 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार पर कांग्रेस नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय विचार-विमर्श के लिए नयी दिल्ली पहुंच गये हैं। इस बीच ऐसी उम्मीदें हैं कि पार्टी 20 खाली पड़े मंत्री पदों को भरने की बहुप्रतीक्षित प्रक्रिया को जल्द ही अंतिम रूप दे सकती है।

यह दौरा एक सप्ताह तक चली बेनतीजा चर्चाओं के बाद और ऐसे समय में हो रहा है, जब मंत्री पद के दावेदारों की लामबंदी तेज हो गयी है। इससे मंत्रिमंडल का गठन करते समय क्षेत्रीय, जातीय और गुटीय हितों के बीच संतुलन साधने को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है।

कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि श्री शिवकुमार के मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी, एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, एआईसीसी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला से मुलाकात करने की उम्मीद है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के भी इस विचार-विमर्श में शामिल होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री के आधिकारिक कार्यक्रम में हालांकि केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठकों का उल्लेख है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में होने वाली चर्चाओं में मंत्रिमंडल विस्तार का मुद्दा ही छाया रहेगा।

सोमवार को बातचीत में श्री शिवकुमार ने मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी को स्वीकार किया और कहा, "सिद्दारमैया और मैं दिल्ली जा रहे हैं। मंत्रिमंडल का विस्तार होना ही है, इसमें पहले ही देरी हो चुकी है।"विचार-विमर्श का यह नया दौर पिछले सप्ताह राष्ट्रीय राजधानी में हुई बैठकों के बाद हो रहा है। जहां श्री गांधी, श्री वेणुगोपाल और श्री सुरजेवाला के साथ चर्चा हुई थी, वहीं श्री खरगे के साथ बैठक नहीं हो सकी थी, क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष निजी काम से बेंगलुरु गये हुए थे। बाद में शनिवार को श्री शिवकुमार ने बेंगलुरु में श्री खरगे से मुलाकात की थी।

मंत्रिमंडल विस्तार का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि श्री सिद्दारमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद तीन जून को 14 सदस्यीय मंत्रिपरिषद के साथ शपथ लेने वाले श्री शिवकुमार को संविधान की ओर से स्वीकृत अधिकतम 34 मंत्री पदों में से 20 खाली पदों को भरना अभी बाकी है।

कई विधायकों का मंत्री पद के लिए अपना दावा मजबूत करने के साथ ही कांग्रेस नेतृत्व के सामने मंत्रिमंडल में राजनीतिक और सामाजिक संतुलन बनाये रखते हुए इन परस्पर विरोधी महत्वाकांक्षाओं को साधने की कठिन चुनौती है।

मंगलवार के विचार-विमर्श के नतीजे से ही इस बहुप्रतीक्षित विस्तार के समय और रूपरेखा का फैसला होने की उम्मीद है।

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