चंडीगढ़ , सितंबर 08 -- पंजाब कर विभाग ने मंडी गोबिंदगढ़ स्थित एक फर्म के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 22.53 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से जुड़ी कथित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) चोरी का पता लगाया है।

वित्त, योजना, आबकारी एवं कर मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मंगलवार को बताया कि विभाग की कार्रवाई के दौरान संबंधित फर्म ने मौके पर 9.50 करोड़ रुपये एसजीएसटी के रूप में जमा करवाए हैं। उन्होंने बताया कि मेसर्स जगत मेटल्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ खुफिया जानकारी और डेटा विश्लेषण के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई। विभागीय जांच में कथित तौर पर सामने आया कि फर्म ने ऐसे आपूर्तिकर्ताओं से जुड़े करीब 22.53 करोड़ रुपये के आईटीसी का दावा किया, जिनके जीएसटी पंजीकरण पहले ही रद्द किए जा चुके थे। उन्होंने कहा कि आगे की जांच में कथित लेन-देन की श्रृंखला में ऐसे बिचौलिया आपूर्तिकर्ताओं का भी पता चला, जिन्होंने रद्द किए गए डीलरों से आईटीसी प्राप्त किया था। इससे लेन-देन की वास्तविकता और माल की वास्तविक आवाजाही को लेकर गंभीर संदेह पैदा हुआ।

श्री चीमा के अनुसार विभागीय टीम ने सात सितंबर को मंडी गोबिंदगढ़ स्थित फर्म के व्यावसायिक परिसर में निरीक्षण और तलाशी की कार्रवाई की, जो देर रात तक जारी रही। उन्होंने कहा कि कार्रवाई के दौरान संबंधित पक्ष ने मौके पर 9.50 करोड़ रुपये एसजीएसटी के रूप में जमा करवाए। उन्होंने कहा कि विभाग अब कथित कर चोरी की शेष राशि की वसूली के लिए कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने बताया कि अधिकारी माल की वास्तविक प्राप्ति, टैक्स चालानों की प्रामाणिकता, ई-वे बिल, वाहनों के रिकॉर्ड, तौल पर्चियों, बैंकिंग लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार फर्जी बिलिंग और धोखाधड़ी वाले आईटीसी नेटवर्क की पहचान के लिए डेटा विश्लेषण और तकनीक आधारित जांच का इस्तेमाल कर रही है। विभाग का उद्देश्य राज्य के राजस्व को होने वाले नुकसान को रोकना और कर चोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना है।

वित्त मंत्री ने कहा कि ईमानदार और नियमों का पालन करने वाले करदाताओं को सरकार की ओर से पूरा सहयोग और सुविधा मिलती रहेगी लेकिन कर चोरी और फर्जी आईटीसी लेन-देन में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार टैक्स चोरी के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर कायम है।

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