नयी दिल्ली , मई 15 -- केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने भ्रामक विज्ञापनों में लिप्त पाए जाने पर राजस्थान की दो कोचिंग सेवा फर्मों मोशन एजुकेशन प्रा. लि. के खिलाफ 10 लाख रुपये का जुर्माना और करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी) के खिलाफ 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की शुक्रवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार इन संस्थानों को अनुचित व्यापार प्रथाओं और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्र की अध्यक्षता वाले केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने राजस्थान में कोटा की कोचिंग फर्म मोशन एजुकेशन प्रा.लि. और सीकर की करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी) के खिलाफ आदेश पारित किए हैं। प्राधिकरण ने पाया कि कोचिंग संस्थानों ने आईआईटी-जेईई और नीट परीक्षाओं में सफल उम्मीदवारों के नाम, फोटो और उपलब्धियों का प्रमुखता से उपयोग करते हुए बड़े-बड़े दावे किए और इन उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई।

मोशन एजुकेशन ने " मोशन है तो सिलेक्शन है " के नारे के साथ विज्ञापन में "जेईई एडवांस्ड परिणाम 2025: मोशन के अनुसार जेईई एडवांस्ड में उत्तीर्ण छात्रों का प्रतिशत 3231/6332 = 51.02 प्रतिशत" , "जेईई (मुख्य परीक्षा) 65.8 प्रतिशत 6930/10532" , "नीट परिणाम 2025: उत्तीर्ण छात्रों का प्रतिशत 6972/7645 = 91.2 प्रतिशत" बताया था।

"नीट परिणाम 2025- शीर्ष 500 अखिल भारतीय रैंक (सामान्य और ओबीसी) में 19 छात्र और हमारे 7 छात्रों ने 100 से कम में अखिल भारतीय रैंक प्राप्त की है" जैसे दावे किये थे । सीसीपीए ने संस्थान द्वारा अपनी आधिकारिक वेबसाइट, यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम अकाउंट और समाचार पत्रों में प्रकाशित भ्रामक विज्ञापनों का स्वतः संज्ञान लिया। सीसीपीए ने पाया कि संस्थान ने सफल उम्मीदवारों के नाम और तस्वीरें प्रमुखता से प्रदर्शित कीं, साथ ही साथ "पूर्णकालिक कक्षा कार्यक्रम", "आवासीय कार्यक्रम", "नर्चर बैच", "एन्थ्यूज बैच" और "ड्रॉपर/लीडर बैच" जैसे अपने सशुल्क कार्यक्रमों का विज्ञापन किया, जबकि सफल उम्मीदवारों द्वारा किए गए वास्तविक पाठ्यक्रमों का खुलासा नहीं किया।

जांच महानिदेशक द्वारा की गई जांच में पता चला कि विज्ञापनों में दिखाए गए अधिकांश छात्र "आई-एकलव्य (ऑनलाइन)" पाठ्यक्रमों में नामांकित थे। जांच में यह भी पाया गया कि संस्थान ने परीक्षा संपन्न होने के बाद दाखिला लेने वाले कुछ छात्रों के नाम और तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया था, जिससे प्रचार के उद्देश्य से उनकी सफलता का झूठा श्रेय संस्थान को दिया गया था। जांच में यह भी पाया गया कि छात्रों या उनके माता-पिता/अभिभावकों की उचित सहमति प्राप्त किए बिना छात्रों के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया था।

सीसीपीए ने पाया कि बार-बार अवसर दिए जाने और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद संस्थान विज्ञापनों में किए गए कई दावों को साबित करने में विफल रहा।

इसी तरह सीकर के करियर लाइन कोचिंग ने विज्ञापनों में "एमबीबीएस, आईआईटी और अन्य संस्थानों में 1650 से अधिक सीएलसी छात्र" , "नीट में ऑल इंडिया रैंक-100 में 2 सीएलसी छात्र" , "3 सीएलसी छात्र दिल्ली के एम्स में" , " 6 सीएलसी छात्रों ने 720 में से 710 से अधिक अंक प्राप्त किए" , ऑल इंडिया रैंक-1000 में परिणामों में 7 गुना वृद्धि और " सीकर में पिछले वर्ष में सर्वश्रेष्ठ सीएलसी एआईआर-1000 में सर्वाधिक 7 गुना वृद्धि " जैसे दावे किये थे।

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