चंडीगढ़ , सितंबर 11 -- शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने बेअदबी और बहबल कलां गोलीकांड की जांच को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर निशाना साधते हुए शुक्रवार को आरोप लगाया कि वह पंजाब में भ्रष्टाचार और कुशासन के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए 'फर्जी नैरेटिव' खड़ा कर रही है।

शिअद के वरिष्ठ नेता परंबंस सिंह रोमाणा और प्रवक्ता अर्शदीप सिंह क्लेर ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं, लेकिन सरकार यह बताने से क्यों बच रही है कि उन्हें भी अन्य 94 लोगों की तरह लिखित प्रश्नावली क्यों नहीं दी जा रही। उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल आज स्वास्थ्य जांच के कारण एसआईटी के समक्ष पेश नहीं हो सके और 30 सितंबर तक उनके लगातार कार्यक्रम हैं। उन्होंने एसआईटी को 30 सितंबर के बाद पेश होने की उपलब्धता बतायी है।

श्री रोमाणा के अनुसार, अकाली दल ने एसआईटी से अनुरोध किया है कि तब तक सुखबीर बादल को लिखित प्रश्नावली भेजी जाये, जिसका वह जवाब दे सकें। उन्होंने कहा कि जुलाई में एसआईटी के समक्ष पेश होने के बाद भी इसी तरह की मांग की गयी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बेअदबी मामले को उछालकर मुख्यमंत्री कार्यालय और आवास से जुड़े कथित भ्रष्टाचार, नशे और हिरासत में कथित यातना जैसे मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाना चाहती है। उन्होंने मुख्यमंत्री की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर और मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर घुम्मन से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गयी है।

श्री रोमाणा ने बरगाड़ी बेअदबी मामले में प्रदीप क्लेर को लेकर भी आप सरकार पर आरोप लगाये। उन्होंने दावा किया कि पिछली एसपीएस परमार एसआईटी की जांच रिपोर्ट 2022 में सार्वजनिक की जा चुकी है और उसमें किसी अकाली-भाजपा नेता की संलिप्तता नहीं बतायी गयी थी।

बहबल कलां गोलीकांड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में दो एसआईटी पहले ही अदालत में चार चालान पेश कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल इस मामले में एसआईटी के समक्ष तीन बार पेश हो चुके हैं।

श्री क्लेर ने कहा कि पंजाब की जनता जानना चाहती है कि जब पुलिस अधिकारियों समेत 94 लोगों को लिखित प्रश्नावली दी जा सकती है तो सुखबीर बादल को ऐसी प्रश्नावली देने में सरकार को क्या आपत्ति है।

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