भोपाल , फरवरी 24 -- मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित अटल पथ पर 'अमेरिका और भारत व्यापार समझौते के विरोध में कांग्रेस किसान महाचौपाल' के अंतर्गत विशाल जनसभा आयोजित की गई, जिसमें कांग्रेस के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के अनेक वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।

सभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह सहित कई प्रमुख नेताओं ने केंद्र सरकार पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर तीखा प्रहार किया।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्हें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में पहली बार नेता प्रतिपक्ष के रूप में बोलने से रोका गया। उन्होंने कहा कि चीन सीमा विवाद के संदर्भ में पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की पुस्तक का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री से जवाब मांगा गया था, लेकिन स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया।

उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के साथ चार माह से लंबित व्यापार समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो कारणों से स्वीकृति दी। उन्होंने तथाकथित 'एप्सटीन फाइलों' और उद्योगपति गौतम अडानी से जुड़े प्रकरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समझौता राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध है।

श्री गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि लोकसभा में भाषण के तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने बिना मंत्रिमंडल से चर्चा किए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दूरभाष पर चर्चा कर समझौते पर सहमति जताई।

उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में 'आंकड़ा' सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है और भारत के आंकड़े देश की सबसे बड़ी ताकत हैं, किंतु इस समझौते के माध्यम से इन्हें अमेरिका के हवाले किया जा रहा है। उनके अनुसार यह समझौता किसानों, वस्त्र उद्योग और देश की आर्थिक संरचना के लिए घातक सिद्ध होगा।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने श्री गांधी के वक्तव्य का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान खतरे में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है और अमेरिकी कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम जैसे कानूनों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि यह व्यापार समझौता किसानों के लिए घातक साबित होगा। उन्होंने विमुद्रीकरण, वस्तु एवं सेवा कर और कृषि कानूनों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस की आशंकाएं समय के साथ सही साबित हुई हैं।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस ने वर्ष 1965-66 में न्यूनतम समर्थन मूल्य की शुरुआत की थी, जबकि वर्तमान सरकार इस पर ठोस कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने वर्ष 2008 में किसानों की ऋणमाफी का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के सोयाबीन, दाल, गेहूं, मक्का, सरसों तथा दुग्ध उत्पादक किसानों पर इस समझौते का प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। सभा में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, विधायक, पूर्व विधायक, विभिन्न प्रकोष्ठों के अध्यक्ष और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित