रायसेन, 14 फरवरी 2026 (वार्ता) मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में स्थित भोजेश्वर मंदिर अपनी भव्यता और विशाल शिवलिंग के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। भोजपुर में पहाड़ी पर स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

मंदिर में स्थापित शिवलिंग विश्व के सबसे बड़े एकाश्म (एक ही पत्थर से निर्मित) शिवलिंगों में अग्रणी माना जाता है। इसकी कुल ऊंचाई लगभग 5.5 मीटर (18 फीट), व्यास 2.3 मीटर (7.5 फीट) तथा केवल लिंग भाग की ऊंचाई 3.85 मीटर (12 फीट) है। शिवलिंग का आकार इतना विशाल है कि इसका अभिषेक भूमि पर खड़े होकर संभव नहीं है। परंपरा के अनुसार श्रद्धालु जलहरी पर चढ़कर ही अभिषेक और पूजन करते हैं।

इतिहासकारों के अनुसार मंदिर का निर्माण परमार वंश के प्रसिद्ध शासक राजा भोज प्रथम (1010 ई.-1055 ई.) द्वारा कराया गया था। उच्च कोटि की वास्तुकला का यह मंदिर बेतवा नदी के किनारे प्राकृतिक परिवेश में निर्मित है। मंदिर के पीछे बना ढलानदार मार्ग इस बात का प्रमाण माना जाता है कि निर्माण के समय विशाल पत्थरों को ऊपर तक पहुंचाने के लिए विशेष तकनीक अपनाई गई थी।

मंदिर को पांडवकालीन मानने की भी लोकमान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव निकट स्थित भीमबेटका क्षेत्र में ठहरे थे और उसी समय माता कुंती की पूजा हेतु इस शिव मंदिर का निर्माण कराया गया। हालांकि ऐतिहासिक रूप से इसका विकास राजा भोज के काल में हुआ माना जाता है।

मंदिर परिसर में वर्ष में दो बार मेले का आयोजन होता है-मकर संक्रांति और महाशिवरात्रि पर। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां तीन दिवसीय 'भोजपुर महोत्सव' भी आयोजित किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु और पर्यटक शामिल होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार मंदिर के गर्भगृह के ऊपर अधूरी गुम्बदाकार छत भारत में प्रारंभिक गुम्बद निर्माण शैली का उदाहरण मानी जाती है। मंदिर का प्रवेश द्वार भी प्राचीन हिंदू स्थापत्य में अत्यंत विशाल माना जाता है। लगभग 40 फीट ऊंचे चार स्तंभ इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं। भोजेश्वर मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि प्राचीन भारतीय वास्तुकला, शिल्पकला और इंजीनियरिंग कौशल का अद्वितीय प्रमाण भी है।

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