धार , जून 12 -- भोजशाला मामले में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा आदेशों का समुचित पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए संगठन 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' ने केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष गोयल ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय के 15 मई 2026 के निर्णय के बाद 16 मई को एएसआई के महानिदेशक द्वारा भोपाल मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद को जिला प्रशासन के समन्वय से हिंदू समुदाय को पूजा-अर्चना एवं शैक्षणिक गतिविधियों के लिए अप्रतिबंधित प्रवेश उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद लगभग एक माह बीत जाने के बाद भी स्थानीय स्तर पर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश अथवा मानक संचालन प्रक्रिया जारी नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि इस स्थिति से हिंदू समाज में भ्रम और असंतोष का वातावरण बना हुआ है। संगठन का आरोप है कि आदेशों के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है।

पत्र में संगठन ने हाल की कुछ घटनाओं का उल्लेख करते हुए एएसआई के स्थानीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन के अनुसार 17 मई को भोजशाला परिसर में विधिविधान से लगाया गया ध्वज बाद में हटवा दिया गया। इसी प्रकार छह जून को गर्भगृह में स्थापित की गई माता वाग्देवी की प्रतिमा को भी बाद में हटा दिया गया, जिससे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। संगठन ने संस्कृत शिक्षण गतिविधियों में भी बाधा उत्पन्न किए जाने का आरोप लगाया है।

श्री गोयल ने कहा कि एएसआई के भोपाल और धार स्थित अधिकारी उच्च न्यायालय तथा एएसआई महानिदेशक के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। उनका आरोप है कि स्थानीय अधिकारी मामले में निर्णय लेने के बजाय विभिन्न कारणों का हवाला देकर प्रक्रिया को टाल रहे हैं।

संगठन ने पत्र में कहा है कि यदि शासकीय स्तर पर शीघ्र स्थिति स्पष्ट नहीं की गई और आदेशों के पालन को सुनिश्चित नहीं किया गया तो वह राष्ट्रव्यापी अभियान और आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगा।

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