मथुरा , मई 15 -- इंदौर उच्च न्यायालय द्वारा भोजशाला मामले में दिए गए हालिया फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के मथुरा और काशी से जुड़े धार्मिक विवादों में नई हलचल तेज हो गई है। मथुरा में हिंदू पक्षकारों ने फैसले का स्वागत करते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि को "अतिक्रमण मुक्त" कराने की मांग तेज कर दी है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले के याचिकाकर्ता दिनेश शर्मा फलाहारी ने कहा कि भोजशाला प्रकरण में इंदौर उच्च न्यायालय द्वारा एएसआई रिपोर्ट और साक्ष्यों को महत्व दिए जाने से मथुरा और काशी के मामलों में भी हिंदू पक्ष की उम्मीदें मजबूत हुई हैं। उन्होंने कहा कि वह इंदौर हाई कोर्ट के आदेश को आधार बनाकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग करेंगे।

दिनेश शर्मा ने कहा कि न्यायालय ने भोजशाला मामले में सभी पक्षों को सुनने और एएसआई की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद फैसला सुनाया है। उनका आरोप है कि मुगल शासनकाल में कई प्राचीन धार्मिक स्थलों पर कब्जा किया गया था और अब हिंदू समाज को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

मथुरा के हिंदू पक्षकारों का कहना है कि इंदौर हाई कोर्ट के फैसले के बाद पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम 1991 को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। उनका दावा है कि मथुरा और काशी से जुड़े विवाद "अतिक्रमण" से संबंधित हैं, इसलिए इन मामलों में 1991 का कानून प्रभावी नहीं होना चाहिए।

हिंदू पक्ष का यह भी कहना है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद से जुड़े मुकदमे 1947 से पहले से न्यायालयों में लंबित रहे हैं, इसलिए उन्हें उक्त अधिनियम के दायरे से बाहर माना जाना चाहिए। इधर, भोजशाला मामले में आए फैसले के बाद मथुरा में कुछ स्थानों पर लोगों ने मिठाइयां बांटकर खुशी जाहिर की। वहीं इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाई कोर्ट में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और काशी से जुड़े मामलों पर सुनवाई के दौरान बहस और तेज हो सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें उच्च न्यायालय की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं।

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