धार , फरवरी 23 -- केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अधीन मध्यप्रदेश के धार की भोजशाला को लेकर इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच के समक्ष प्रकरण पर आज सुनवाई हुई, जिसके बाद खंडपीठ ने सभी याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट पर दो सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां, सुझाव और सिफारिशें प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि एएसआई की रिपोर्ट पहले ही खोली जा चुकी है, पोर्टल पर अपलोड करने के साथ ही जिन पक्षकारों को रिपोर्ट नहीं मिली थी, अब उन्हें भी उसकी प्रतियां याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध करा दी गई हैं। ऐसे में रिपोर्ट को दोबारा अदालत के समक्ष अनसील करने की आवश्यकता नहीं है।

एएसआई द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट करीब दो हजार 89 पेजों की बनी हुई हैं। भोजशाला में सर्वे के दौरान रिपोर्ट को ही विभाग ने 10 कालखंडो में तैयार किया है। प्रत्येक कालखंड में भोजशाला में मिले इतिहास की विस्तृत जानकारी पेश की गई है। रिपोर्ट के प्रथम हिस्से में 151 पेजों का सारांश रखा गया हैं, सारांश में सर्वे के प्रत्येक बिंदु को शामिल किया गया हैं।

रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद हिंदू पक्षकारों ने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए भोजशाला के भविष्य की और कदम बताया है। याचिकाकर्ता आशीष गोयल के अनुसार रिपोर्ट प्राप्त हो गई हैं, दो हजार से अधिक पेजों की रिपोर्ट का अध्ययन किया जाएगा। जिसके आधार पर ही दावे आपत्ति व सुझाव पेश किए जाएंगे।

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देशित किया कि वे एएसआई की 98 दिन तक चली वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट पर अपनी लिखित आपत्तियां और सुझाव अगली सुनवाई से पहले दाखिल करें।

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