धार , जुलाई 24 -- मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर के निकट जुमे की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने संबंधी मामले में शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई। इस दौरान मुस्लिम पक्ष और केंद्र सरकार की ओर से अपने-अपने पक्ष रखे गए। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए आगामी तिथि निर्धारित की है।
सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने कहा कि न्यायालय के पूर्व निर्देशों के बावजूद प्रशासन ने परिसर के निकट वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं कराया है। उनका कहना था कि प्रस्तावित स्थान सड़क मार्ग से लगभग 1.3 किलोमीटर दूर है, जिससे नमाजियों को असुविधा होगी।
इस पर केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय को बताया कि प्रशासन द्वारा चिह्नित स्थान लगभग 900 मीटर की दूरी पर है तथा सरकारी तंत्र और दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों के बीच सौहार्दपूर्ण वातावरण में बातचीत जारी है। उन्होंने इस संबंध में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के लिए समय देने का अनुरोध किया।
उल्लेखनीय है कि 22 जुलाई को उच्चतम न्यायालय ने प्रशासन को भोजशाला परिसर के निकट नमाज के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने के संबंध में निर्देश दिए थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने मालीवाड़ा क्षेत्र स्थित चालीस पीर दरगाह के समीप एक स्थान चिह्नित किया था, जिसे मुस्लिम पक्ष ने दूरी और उपयुक्तता के आधार पर स्वीकार नहीं किया। इसके चलते शुक्रवार को समुदाय के लोगों ने भोजशाला जाने के बजाय अपने-अपने क्षेत्रों की मस्जिदों में जुमे की नमाज अदा की।
मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने कहा कि मुस्लिम समाज का पक्ष शुरू से यही रहा है कि वह अपने पारंपरिक स्थान पर नमाज अदा करना चाहता है। उन्होंने कहा कि अब समाज उच्चतम न्यायालय की अगली सुनवाई का इंतजार कर रहा है।
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