धार , मई 15 -- मध्यप्रदेश हाई कोर्ट द्वारा धार स्थित भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर एवं संरक्षित स्मारक मानने के फैसले के बाद शहर में हिंदू समाज ने खुशी जताते हुए जश्न मनाया, जबकि मुस्लिम पक्ष ने निर्णय की कानूनी समीक्षा कर आगे की रणनीति तय करने की बात कही है।

उच्च न्यायालय ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर भोजशाला को "पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम 1958" के तहत संरक्षित स्मारक माना है। अदालत ने इसके धार्मिक स्वरूप को मां वाग्देवी सरस्वती मंदिर के रूप में स्वीकार करते हुए हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार दिया है। साथ ही वर्ष 2003 के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति दी गई थी।

अदालत ने केंद्र सरकार को लंदन स्थित संग्रहालय में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने संबंधी प्रस्तुतिकरण पर विचार करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके अलावा मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक भूमि आवंटन के लिए सरकार के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने का विकल्प दिया गया है।

फैसले की जानकारी मिलते ही धार शहर में जश्न का माहौल बन गया। मंडी रोड स्थित ज्योति मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए और मां वाग्देवी के जयकारे लगाए। लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी तथा गुलाल उड़ाकर खुशी व्यक्त की।

भोज उत्सव समिति और अन्य हिंदू संगठनों ने फैसले को आस्था और वर्षों के शांतिपूर्ण आंदोलन की जीत बताया। महिलाओं ने अखंड ज्योति मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना कर दीप प्रज्वलित किए और आरती उतारी।

हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि वर्ष 2022 में दायर याचिका में भोजशाला को हिंदू मंदिर और संस्कृत अध्ययन केंद्र बताते हुए विशेष पूजा अधिकार की मांग की गई थी। उन्होंने कहा कि चार वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया और एएसआई की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट के आधार पर यह ऐतिहासिक निर्णय आया है।

हिंदू पक्ष ने फैसले के विरुद्ध संभावित अपील को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में कैविएट भी दायर की है। याचिकाकर्ता जितेंद्र सिंह विशेन की ओर से दाखिल कैविएट में अनुरोध किया गया है कि किसी भी अपील पर हिंदू पक्ष को सुने बिना आदेश पारित नहीं किया जाए।

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