धार , फरवरी 15 -- भोजशाला के भविष्य और धार्मिक स्वरूप को लेकर सोमवार से उच्च न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई प्रारंभ होगी। सुनवाई के पहले दिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा प्रस्तुत सर्वे रिपोर्ट खोली जाएगी।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन संरक्षित इस ऐतिहासिक स्थल से संबंधित प्रकरण की सुनवाई मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में निर्धारित है। यह मामला न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच में सूचीबद्ध है।

सुनवाई के दौरान एएसआई की 98 दिनों तक चले वैज्ञानिक सर्वेक्षण पर आधारित रिपोर्ट की प्रतियां हिंदू एवं मुस्लिम पक्षकारों तथा उनके अधिवक्ताओं को उपलब्ध कराई जाएंगी। यह पहला अवसर होगा जब सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से सामने आएगी। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि इसी रिपोर्ट के आधार पर भोजशाला के वास्तविक एवं धार्मिक स्वरूप को लेकर न्यायालय निर्णय करेगा।

उल्लेखनीय है कि 28 जनवरी को उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में अहम निर्देश जारी किए थे। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के विरुद्ध दायर अपील का निस्तारण करते हुए निर्देश दिया था कि प्रकरण की सुनवाई डिवीजन बेंच द्वारा की जाए। साथ ही कहा गया था कि यदि रिपोर्ट का कोई भाग प्रतिलिपि योग्य न हो तो विशेषज्ञों एवं अधिवक्ताओं की उपस्थिति में निरीक्षण की अनुमति दी जाए।

पक्षकारों को अपनी आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जाएगा। साथ ही उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय तक भोजशाला के मूल स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। 7 अप्रैल 2003 को एएसआई द्वारा जारी आदेश के अनुसार पूजा एवं नमाज की वर्तमान व्यवस्था यथावत लागू रहेगी।

हालांकि शीर्ष अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है और सभी कानूनी दलीलें उच्च न्यायालय में खुली रहेंगी। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से याचिकाकर्ता आशीष गोयल, वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन एवं अधिवक्ता विनय जोशी सुनवाई के दौरान उपस्थित रहेंगे।

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