नैनीताल , जून 4 -- उत्तराखंड में नैनीताल जिला प्रशासन ने भूमि उपयोग नियमों के उल्लंघन के मामलों में गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए कई भूखंडों को राज्य सरकार में निहित करने के आदेश जारी किए हैं।

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के अनुसार कैंचीधाम, हल्द्वानी और रामनगर क्षेत्र से जुड़े मामलों में कृषि, बागवानी और आवासीय प्रयोजन के लिए आवंटित या खरीदी गई भूमि पर रिसॉर्ट, दुकान और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

सबसे चर्चित मामला ग्राम छड़ा, पट्टी मझेड़ा, कैंचीधाम क्षेत्र का है, जहां आनंद सिंह और राजेंद्र सिंह पुत्र पूरन सिंह को कृषि कार्य के लिए पट्टे पर दी गई भूमि पर मकान और दुकान का निर्माण कर लिया गया था। जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने सुनवाई के बाद 0.033 हेक्टेयर भूमि का पट्टा निरस्त कर जमीन को राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश दिए हैं।

एक अन्य मामले में बच्ची राम, मोहन चंद्र, लीला देवी और भगवती देवी, निवासी हल्द्वानी तल्ली, तहसील हल्द्वानी द्वारा सामान्य श्रेणी की महिला के पक्ष में 750 वर्ग फुट भूमि का अंतरण किया गया था। मामले में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर न्यायालय ने संबंधित भूमि को अंतरण की तिथि से ही राज्य सरकार में निहित घोषित कर दिया।

रामनगर क्षेत्र में भी बड़ी कार्रवाई हुई है। ढेला बंदोबस्ती, तहसील रामनगर निवासी बाग सिंह को कृषि कार्य के लिए 0.100 हेक्टेयर भूमि पट्टे पर दी गई थी लेकिन निरीक्षण में वहां रिसॉर्ट संचालित मिला। प्रशासन पहले ही रिसॉर्ट को सील कर चुका था। अब जिलाधिकारी न्यायालय ने पूरी भूमि को राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने का आदेश पारित कर दिया है।

इसी तरह कुमायूं पेपर पैक्स प्राइवेट लिमिटेड, रामनगर तथा उससे जुड़े रमेश चावला, रचित चावला, मीना चावला और कनिका चावला के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है। आवासीय प्रयोजन के लिए खरीदी गई भूमि पर रिसॉर्ट संचालन पाये जाने और भूमि उपयोग परिवर्तन की शर्तों के उल्लंघन के बाद 3572 वर्ग मीटर भूमि राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश जारी किये गये हैं।

कैंचीधाम क्षेत्र के ग्राम सुल्तान में भी बड़ा फैसला आया है। श्रीमती भानवी सिंह, निवासी बैंती कोठी, बैंती ऊपरहार, प्रतापगढ़ (कुंडा), उत्तर प्रदेश ने बागवानी के लिए भूमि खरीदी थी। जांच में 27 नाशपाती के पेड़ और उनके लिए आवश्यक पहुंच मार्ग को सुरक्षित रखते हुए 0.0344 हेक्टेयर भूमि उनके पास रहने दी गई, जबकि शेष 0.5206 हेक्टेयर भूमि राज्य सरकार में निहित करने के आदेश दिए गए हैं।

जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को भूमि माफियाओं और नियमों को ताक पर रखकर कृषि या आवासीय भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वालों के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है। कैंचीधाम और रामनगर जैसे पर्यटन क्षेत्रों में रिसॉर्ट और व्यावसायिक निर्माणों पर प्रशासन की बढ़ती सख्ती से कई अन्य मामलों की भी जांच तेज होने की संभावना है।

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