चंडीगढ़ , मई 15 -- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि राज्य में जमीन संबंधी विवादों के त्वरित समाधान के लिए सभी जिलों में राजस्व लोक अदालतें लगाई जाएंगी। उपायुक्त, उपजिलाधिकारी और तहसीलदार आपसी सहमति से समयबद्ध तरीके से विवादों का निपटारा कराएंगे।

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को हरियाणा विजन-2047 के तहत राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की पंचवर्षीय कार्ययोजना की समीक्षा बैठक में बोल रहे थे।

बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि विवादों के शीघ्र निपटारे के लिए डिजिटल अदालत मामले प्रबंधन प्रणाली लागू किया जाएगा। इस पर मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय लोक अदालत की तर्ज पर राजस्व लोक अदालत लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पटवारियों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाए और अधिकारी लक्ष्य तय कर भू-विवाद सुलझाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व विभाग में नई ऑनलाइन सेवाएं शुरू की जाएं। सभी नव-नियुक्त पटवारियों को लैपटॉप, टैबलेट और हाई-स्पीड इंटरनेट दिया जाए। पटवारियों के प्रशिक्षण के लिए राज्य स्तरीय केंद्र भी खुलेगा।

श्री सैनी ने कहा कि सभी स्टाम्प की बिक्री ई-स्टाम्प से हो और इसे ब्लॉक-चेन आधारित किया जाए। बाहर रहने वाले लोगों के लिए फेसलेस रजिस्ट्रेशन की सुविधा शुरू होगी। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में चार लाख पेपरलैस रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं और 15 दिन से पुराना कोई आवेदन लंबित नहीं है। शहरी संपत्ति रिकॉर्ड को प्रॉपर्टी आईडी से लिंक किया जाएगा।

आपदा प्रबंधन की समीक्षा में बताया गया कि आपदा एवं अग्नि सेवाओं के लिए अलग विभाग का प्रस्ताव है। आपदा मित्र योजना का आठ से बढ़ाकर सभी 23 जिलों में विस्तार होगा। सभी जिलों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित एकीकृत कमांड सेंटर बनेंगे और अग्निशमन में रोबोट के इस्तेमाल पर विचार होगा। मुख्यमंत्री ने अग्निशमन कर्मियों का जोखिम कम करने और कल्याण की योजना बनाने को भी कहा।

बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, ओएसडी डॉ. राज नेहरू, उप प्रधान सचिव यशपाल यादव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित