लखीमपुर खीरी , अप्रैल 11 -- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बांग्लादेश से विस्थापित विभिन्न हिंदू परिवारों को संक्रमणीय एवं असंक्रमणीय भूमिधरी अधिकार पत्र वितरित करते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि न्याय का वह क्षण है, जिसने इतिहास की अधूरी तमन्ना को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में धर्म की व्याख्या "परहित सरिस धरम नहिं भाई" के रूप में की गई है और इसी भावना के साथ डबल इंजन सरकार पिछले नौ वर्षों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास में पहली बार थारू समुदाय, जो महाराणा प्रताप को अपना पूर्वज मानता है, उसे भूमि अधिकार उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के वर्तमान वंशजों को भी अधिकार पत्र दिए गए हैं, जिन्हें पूर्ववर्ती सरकारों ने बसाया तो था, लेकिन स्वामित्व अधिकार नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश से विस्थापित परिवार वर्षों पूर्व भारत आए थे और अपने साथ पीड़ा, असुरक्षा तथा अनिश्चित भविष्य लेकर आए थे। अब उन्हें भारत की धरती पर सम्मान और अधिकार मिल रहे हैं।

योगी ने कहा कि इन परिवारों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के अंतर्गत अधिकार दिए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस कानून का विरोध किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार समाज के सभी वर्गों को न्याय और सम्मान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा यह निर्णय उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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