मुरादाबाद , मई 20 -- उत्तर प्रदेश सरकार में हाल ही में हुए विभागों के बंटवारे में मुरादाबाद के मूल निवासी भूपेंद्र चौधरी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) तथा निर्यात प्रोत्साहन मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर पीतल नगरी मुरादाबाद के उद्योग जगत में नई उम्मीदें जागी हैं। योगी सरकार में तीसरी बार मंत्री पद की शपथ लेने वाले भूपेंद्र चौधरी को लेकर राजनीतिक गलियारों में लोक निर्माण विभाग या नगर विकास मंत्रालय मिलने की चर्चाएं थीं, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने उन्हें एमएसएमई और निर्यात प्रोत्साहन जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी देकर सभी को चौंका दिया।
मंत्रालय संभालने के बाद भूपेंद्र चौधरी ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा औद्योगिक और निर्यात हब बनाना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।
भूपेंद्र चौधरी के मुरादाबाद मूल का होने के कारण पीतल उद्योग, हस्तशिल्प और लघु उद्योग से जुड़े कारोबारियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। कारोबारियों का मानना है कि स्थानीय परिस्थितियों और उद्योग जगत की समस्याओं से भलीभांति परिचित होने के कारण वे क्षेत्र की समस्याओं को सरकार के समक्ष अधिक प्रभावी ढंग से उठा सकेंगे।
हस्तशिल्प निर्यात संवर्द्धन परिषद से जुड़े लोगों का कहना है कि मंत्रालय का प्रभार मुरादाबाद के नेता को मिलने से स्थानीय उद्योगों और आर्टिजंस के बीच सकारात्मक संदेश गया है। वहीं इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट कमेटी ने इसे मेटल और हस्तशिल्प उद्योग के लिए गर्व का विषय बताया है।
भूपेंद्र चौधरी ने भी अपने वक्तव्यों में भरोसा दिलाया है कि वे मुरादाबाद के पीतल कारोबार समेत प्रदेश के पारंपरिक उद्योगों की समस्याओं से परिचित हैं और उद्योगों को हरसंभव सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
मुरादाबाद मंडल के लोगों का मानना है कि पंचायती राज विभाग में अपने कार्यकाल की तरह भूपेंद्र चौधरी इस नए विभाग में भी प्रभावी भूमिका निभाएंगे और प्रदेश के लघु एवं मध्यम उद्योगों को नई दिशा देंगे। लोगों को उम्मीद है कि उनकी नीतियां युवाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में मददगार साबित होंगी।
हालांकि उद्योग जगत का मानना है कि नए मंत्री के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं। वैश्विक मंदी, बढ़ती उत्पादन लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा के कारण निर्यात कारोबार दबाव में है। द हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि वर्तमान में निर्यातकों को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी पर्याप्त नहीं है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिके रहना मुश्किल हो रहा है।
उद्यमियों को उम्मीद है कि नए एमएसएमई मंत्री सब्सिडी, वित्तीय प्रोत्साहन और अन्य नीतिगत सुविधाओं की समीक्षा कर शिल्पकारों, निर्यातकों और बेरोजगार युवाओं को राहत पहुंचाने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे। अब आने वाला समय ही तय करेगा कि भूपेंद्र चौधरी उद्योग जगत की इन अपेक्षाओं पर कितना खरा उतर पाते हैं।
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