देहरादून , मार्च 21 -- भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद वन अनुसंधान संस्थान देहरादून में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस 2026 के अवसर पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया और कहा कि प्रकृति सर्वोपरि है और मानव अस्तित्व के लिए उसके साथ सह-अस्तित्व में रहना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि वन संरक्षण का अर्थ केवल पेड़ लगाना ही नहीं है, बल्कि इसमें पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण भी शामिल है।
इस मौके पर मंत्रालय के सहयोग से, आज और रविवार को आईसीएफआरईए देहरादून में वन-आधारित सतत जैव-अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना: मुद्दे और चुनौतियाँ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन कर रहा है।
उन्होंने वानिकी के प्रति समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय का आह्वान किया, और वन संसाधनों को बनाए रखने में सांस्कृतिक मूल्यों, ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (जीसीपी), और कार्बन क्रेडिट के महत्व को रेखांकित किया।
केन्द्रीय मंत्री ने अपने संबोधन का समापन इस बात के साथ किया कि वन केवल अर्थव्यवस्था के लिए ही नहीं, बल्कि शांति के लिए भी आवश्यक हैं।
कार्यशाला में उद्यमिता, और जैव-अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में नवाचार की भूमिका जैसे मुख्य विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह वन संसाधनों के सतत उपयोग को रेखांकित करता है, जिसका उद्देश्य मूल्य-वर्धित उत्पादों का निर्माण करना, स्थानीय आजीविका को सहारा देना और प्राकृतिक वनों पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है।
तकनीकी सत्रों में कृषि-वानिकी, गैर-काष्ठ वन उत्पाद, इंजीनियर्ड काष्ठ उत्पाद, वन उद्योग, कार्बन बाज़ार, वन्यजीव संरक्षण, इको-टूरिज़्म और डिजिटल निगरानी जैसे विषय शामिल हैं।
यह कार्यशाला पूरे देश से वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के हितधारकों और वन प्रबंधकों को एक मंच पर लाती है। ताकि भारत की वन-आधारित जैव-अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने पर विचार-विमर्श किया जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य प्रमुख चुनौतियों की पहचान करना, अवसरों की तलाश करना और इस क्षेत्र में नीतिगत तथा रणनीतिक हस्तक्षेपों को दिशा देना है।
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