प्रयागराज , फरवरी 28 -- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले की कोरांव तहसील अंतर्गत प्रथम ग्रामदानी गांव बरनपुर में 632 बीघा भूदान भूमि को लेकर विवाद एक बार फिर तूल पकड़ गया है। कार्रवाई न होने से नाराज ग्रामीण 24 फरवरी से तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं और शनिवार को भी धरना जारी रहा। जानकारी के अनुसार वर्ष 1957 में विनोबा भावे के परम शिष्य धीरेन्द्र मजूमदार ने बरनपुर में 632 बीघा भूमि भूदान में प्राप्त कर ग्राम स्वराज की नींव रखी थी। भूदान यज्ञ समिति द्वारा 18 निर्धन भूमिहीन कोल परिवारों को पांच-पांच बीघा भूमि का पट्टा दिया गया था। आरोप है कि वर्ष 1959 में 'सर्वोदय मंडल' नामक संस्था बनाकर कथित कूटरचित हस्ताक्षरों के आधार पर पूरी 632 बीघा भूमि अपने नाम दर्ज करा ली गई और शेष भूमि पर सामूहिक खेती शुरू कर दी गई।

वर्ष 2000 में उपजिलाधिकारी कोरांव न्यायालय में धारा 229-बी के तहत वाद दायर कर सर्वोदय मंडल को फर्जी संस्था बताते हुए भूमि काबिज काश्तकारों के नाम दर्ज करने की मांग की गई थी। 28 जून 2025 को उपजिलाधिकारी (न्यायिक) ने वादी और सर्वोदय मंडल दोनों को अतिक्रमणकारी मानते हुए वाद खारिज कर दिया।

बताया जाता है कि वर्ष 2015 में पट्टेदारों की 90 बीघा भूमि पर कब्जे के प्रयास से विवाद और बढ़ गया, जिसके बाद पूरी भूमि को कुर्क कर कोरांव थाना की सुपुर्दगी में दे दिया गया।

आरोप है कि 23 नवंबर से 10 दिसंबर 2025 के बीच कुछ लोगों ने कुर्कशुदा भूमि में जबरन जुताई कर लगभग 400 बीघा में गेहूं और सरसों की बुवाई कर दी। पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए तीन ट्रैक्टर सीज किए और छह लोगों को विभिन्न धाराओं में जेल भेजा। जमानत पर रिहाई के बाद मारपीट की घटना में 20 लोगों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

ग्रामीणों ने विवादित भूमि पर उगी फसल को नष्ट कराने के लिए प्रशासन से टीम गठित करने की मांग की है। उनका आरोप है कि प्रार्थना पत्र पर कोई सुनवाई नहीं हुई। भारतीय किसान यूनियन (आजाद हिंद) और राइजिंग इंडिया के बैनर तले किसानों ने चेतावनी दी थी कि कार्रवाई न होने पर धरना देंगे। मांग पूरी न होने पर 24 फरवरी से किसान तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं।

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