ग्रेटर नोएडा , अगस्त 04 -- उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा के इकोटेक एक्सटेंशन-तृतीय स्थित आईएलजेआईएन इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड में हुए भीषण अग्निकांड के बाद संयुक्त जांच में भवन और मशीनरी की सुरक्षा को लेकर गंभीर तथ्य सामने आए हैं।
मंगलवार को जांच कार्रवाई के उपरांत सहायक निदेशक कारखाना एवं श्रम प्रवर्तन अधिकारियों ने जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि संयुक्त जांच टीम ने घटनास्थल का विस्तृत निरीक्षण करने के बाद कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के तहत क्षतिग्रस्त भवन, समस्त मशीनरी, विद्युत प्रणाली एवं उत्पादन गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार आग की शुरुआत तड़के लगभग तीन बजे के करीब फैक्ट्री की पहली मंजिल पर स्थित एजिंग टेस्टिंग एरिया में हुई। आग लगते ही फैक्ट्री प्रबंधन ने कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला और अग्निशमन विभाग को सूचना दी। इसके बाद दमकल विभाग की कई टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने का अभियान शुरू किया।
संयुक्त जांच में पाया गया कि आग की भीषणता के कारण पहली मंजिल पर स्थापित पीयूएफ रूफिंग सिस्टम, स्टील ट्रस, स्टील बीम, कॉलम और अन्य संरचनात्मक सदस्य अत्यधिक तापमान से गंभीर रूप से प्रभावित हुए।
विशेषज्ञों के अनुसार आग के दौरान स्टील संरचना में तापीय प्रसार तथा आग बुझाने में बड़ी मात्रा में पानी के इस्तेमाल से तीव्र तापीय संकुचन हुआ, जिससे संरचना में अवशिष्ट तनाव,संरचनात्मक विफलता,पराभव सामर्थ्य में कमी और भार वहन क्षमता प्रभावित होने की आशंका है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आग बुझाने की कार्रवाई के बीच भवन की बाहरी ईंट निर्मित दीवार अचानक ढह गई, जिसकी चपेट में आकर अग्निशमन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी आ गए। इस दर्दनाक हादसे में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग के दो अधिकारियों/कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य अग्निशमन कर्मी गंभीर रूप से घायल होकर उपचाराधीन हैं। इसके अलावा फैक्ट्री कर्मचारी त्रिभुवन तिवारी भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं और उनका इलाज ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में चल रहा है।
निरीक्षण में फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था में भी गंभीर कमियां सामने आईं। जांच टीम ने पाया कि भवन में प्राकृतिक धुआं निकासी की प्रभावी व्यवस्था नहीं थी। वहीं पहली मंजिल से लगातार पानी का रिसाव भूतल और बेसमेंट तक पहुंच रहा था, जिससे विद्युत पैनल, केबल, पीएलसी, सर्वो ड्राइव, इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण प्रणाली और अन्य विद्युत उपकरणों के प्रभावित होने की संभावना जताई गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आग के कारण स्टील संरचना, आरसीसी सदस्यों, नींव तथा पूरे भवन की संरचनात्मक स्थिरता पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। ऐसे में भारी मशीनों के संचालन से उत्पन्न कंपन के कारण भवन के आंशिक या पूर्ण रूप से ध्वस्त होने, दोबारा विद्युत दुर्घटना, आग या अन्य औद्योगिक हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इन्हीं गंभीर परिस्थितियों, उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों, भवन की संरचनात्मक क्षति, दो अग्निशमन अधिकारियों की मृत्यु, अन्य कर्मियों के गंभीर रूप से घायल होने तथा मानव जीवन पर उत्पन्न गंभीर एवं आसन्न खतरे को देखते हुए सक्षम प्राधिकारी ने कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के तहत फैक्ट्री के क्षतिग्रस्त भवन, मशीनरी, विद्युत प्रणाली और सभी उत्पादन गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश जारी किया है।
प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि आदेश अथवा उसके किसी भी प्रावधान का उल्लंघन किया गया तो कारखाना दखलकार एवं कारखाना प्रबंधक के विरुद्ध कारखाना अधिनियम, 1948 की संबंधित धाराओं के तहत विधिक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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