भीलवाड़ा , मई 15 -- राजस्थान में भीलवाड़ा जिले में चंबल परियोजना के जरिए घर-घर और तीन मंजिल तक भरपूर दबाव के साथ पानी पहुँचाने के बड़े-बड़े दावे धरातल पर पूरी तरह दम तोड़ते नजर आ रहे हैं।
शुक्रवार को शहर की आर.के. कॉलोनी के हालात यह हैं कि यहाँ के बाशिंदे भीषण गर्मी के बीच पांच फुट गहरे गड्ढों में उतरकर पानी भरने को मजबूर हैं।क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रशासन ने ऊंची इमारतों तक पानी पहुँचाने का वायदा किया था, लेकिन हकीकत में नलों में पानी का दबाव इतना कम है कि मात्र 10 से 15 मिनट ही जलापूर्ति हो पाती है। पानी के इस कम दबाव के कारण लोगों को एक-एक बाल्टी पानी के लिए भारी जतन करना पड़ रहा है।
यही स्थिति जवाहर नगर और पांसल रोड की बस्तियों में भी बनी हुई है, जहाँ लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। यहां के रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि सिर्फ पानी की किल्लत ही बड़ी समस्या नहीं है, बल्कि नलों से साफ पानी की जगह गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है। मजबूरन लोग इस दूषित पानी को पीने को विवश हैं, जिससे बीमारियों की आशंका बढ़ गई है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस संबंध में जलदाय विभाग और संबंधित अधिकारियों को कई बार शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन सत्ता और प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित