भीलवाड़ा , सितम्बर 15 -- राजस्थान में भीलवाड़ा जिले में हुए नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस के लिए कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं।
चुनाव से पहले टिकट वितरण को लेकर खींचतान, आपसी विवाद और संगठनात्मक कमजोरी की चर्चाओं के बाद अब परिणामों ने पार्टी की जमीनी स्थिति को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। भीलवाड़ा के साथ जिले के कई निकायों में कांग्रेस अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी लेकिन जहाजपुर नगरपालिका के परिणाम पार्टी की सबसे कमजोर तस्वीरों में से एक के रूप में सामने आए हैं।
जिले के 25 वार्डों वाली जहाजपुर नगरपालिका में कांग्रेस के सभी प्रत्याशियों को मिलाकर कुल तीन हजार 472 मत ही मिले। इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह रही कि कई वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशी अपने परिवार, रिश्तेदारों और करीबी समर्थकों के संभावित मतों के बराबर भी समर्थन जुटाते नजर नहीं आए। कुछ प्रत्याशी तो एक अंक में ही सिमट गए। जहाजपुर के चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो कांग्रेस के लिए सबसे ज्यादा चर्चा वार्ड नंबर पांच की है। यहां कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप खटीक को महज एक मत मिला। इसी तरह वार्ड नंबर नौ में रामकुमार को तीन, वार्ड नंबर 12 में चंदा सोनी को 10, वार्ड नंबर 16 में रफीक को आठ, वार्ड नंबर 22 में हेमंत मीणा को तीन और वार्ड नंबर 24 में परमेश्वर को महज सात मत ही मिले।
इन आंकड़ों ने कांग्रेस के वार्ड स्तर के संगठन पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि आखिर इन वार्डों में कांग्रेस का संगठन कहां था। बूथ स्तर के पदाधिकारी, वार्ड कार्यकारिणी और स्थानीय कार्यकर्ताओं की सक्रियता चुनाव के दौरान दिखाई क्यों नहीं दी। वार्ड नंबर चार में तो कांग्रेस प्रत्याशी तक मैदान में नहीं उतार सकी। ऐसे में 25 वार्डों वाली नगरपालिका में पार्टी की संगठनात्मक तैयारी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कांग्रेस की स्थिति को समझने के लिए केवल कुल मतों का आंकड़ा ही पर्याप्त नहीं है। वार्डवार परिणाम पार्टी की जमीनी स्थिति की एक और तस्वीर सामने रखते हैं। वार्ड नंबर छह में जैबु निशा को 79, वार्ड नंबर 20 में ममता देवी को 63, वार्ड नंबर 21 में मंजू को 23, वार्ड नंबर 23 में किरण मीणा को 28 और वार्ड नंबर 25 में रामसिंह को 28 मत मिले।
कई वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों से ज्यादा वोट निर्दलीय प्रत्याशियों के खाते में गए। इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि स्थानीय स्तर पर मतदाताओं का एक हिस्सा पार्टी के बजाय उम्मीदवार अथवा स्थानीय समीकरणों को प्राथमिकता दे रहा था।
जहाजपुर को कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन से जुड़े नेता धीरज गुर्जर के प्रभाव वाले क्षेत्र के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में यहां कांग्रेस का कमजोर प्रदर्शन राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। नतीजों के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। सवाल यह है कि पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्र में ही वार्ड स्तर पर संगठन इतनी कमजोर स्थिति में दिखाई दे रहा है तो आगामी बड़े चुनावों में कांग्रेस किस रणनीति के सहारे मैदान में उतरेगी। हालांकि किसी एक निकाय के परिणाम को पूरे संगठन की स्थिति का अंतिम पैमाना नहीं माना जा सकता लेकिन जहाजपुर के आंकड़े निश्चित तौर पर कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का विषय हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जहाजपुर में विधायक गोपीचंद मीणा के नेतृत्व में स्पष्ट बहुमत हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए भी कुछ वार्डों के नतीजे संगठनात्मक कमजोरी की ओर इशारा करते दिखाई दिए।
वार्ड नंबर 15 में भाजपा की प्रेमलता को महज एक मत मिला, जबकि वार्ड नंबर 17 में भाजपा प्रत्याशी सिद्दीकी को केवल छह मत मिले। इससे यह सवाल उठ सकता है कि पार्टी का मजबूत प्रदर्शन पूरे नगरपालिका क्षेत्र में समान रूप से संगठनात्मक मजबूती में तब्दील हुआ या नहीं। इस पार्टी के संगठन की बड़ी चर्चा होतो है, लेकिन इन वार्डों में जो कुछ देखने को मिला है। उस इन वर्ड में संगठन पर प्रश्न चिन्ह लगता नजर आ रहा है।
इसी तरह आरएलपी की शबाना को वार्ड नंबर 11 में केवल पांच मत मिले। दूसरी ओर, निर्दलीय प्रत्याशी शकीला और विमला ने इससे कहीं अधिक मत हासिल किए। यह परिणाम भी बताता है कि स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी के चुनाव चिन्ह के साथ-साथ उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और स्थानीय समीकरण कितने महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
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