भीलवाड़ा , सितम्बर 23 -- राजस्थान में भीलवाड़ा में पंचायती राज चुनाव से पहले बुधवार को हुई आरक्षण लॉटरी ने जिले की पंचायत समितियों में महिला नेतृत्व की तस्वीर भी साफ कर दी है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 16 पंचायत समितियों में प्रधान पदों के आरक्षण के बाद आठ पंचायत समितियां महिला प्रधान के लिए आरक्षित हुई हैं। इनमें एससी महिला, एसटी महिला, ओबीसी महिला और अनारक्षित महिला वर्ग शामिल हैं।

इन पंचायत समितियों में अब प्रधान पद के लिए महिला दावेदारों के बीच मुकाबले की जमीन तैयार हो गई है। आरक्षण में फूलिया कलां एससी महिला और खजूरी एसटी महिला के लिए आरक्षित हुई है। वहीं करेड़ा ओबीसी महिला वर्ग में गया है। इसके अलावा जहाजपुर, सहाड़ा, शाहपुरा, सुवाना और मांडल पंचायत समितियां अनारक्षित महिला वर्ग में आई हैं।

इस तरह महिला आरक्षण वाले पदों पर अब चुनावी मैदान में महिला दावेदारों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। खास तौर पर अनारक्षित महिला वर्ग में आई पंचायत समितियों में कई राजनीतिक परिवारों और स्थानीय दावेदारों की नजर प्रधान पद पर टिक सकती है।

लॉटरी में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग को भी प्रधान पदों में प्रतिनिधित्व मिला है। एससी ओपन में शंभूगढ़ और बिजौलिया, जबकि एसटी ओपन में बनेड़ा पंचायत समिति आई है। इस तरह आरक्षण ने जिले की पंचायत समितियों में अलग-अलग सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधित्व का रास्ता भी तय कर दिया है।

ओबीसी के खाते में आसींद और हुरड़ा पंचायत समितियां ओबीसी ओपन और करेड़ा ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हुई है। वहीं कोटड़ी, मांडलगढ़ और रायपुर अनारक्षित ओपन श्रेणी में हैं। प्रधान पदों का आरक्षण तय होने के साथ ही अब दावेदारों के बीच हलचल बढ़ना तय माना जा रहा है। हालांकि जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य पदों की सीटवार आरक्षण सूची सामने आने के बाद ही ग्रामीण क्षेत्रों का पूरा चुनावी गणित स्पष्ट होगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित