भीलवाड़ा , अक्टूबर 04 -- राजस्थान के पूर्व राजस्व मंत्री एवं भीलवाड़ा जिला देहात कांग्रेस अध्यक्ष रामलाल जाट ने भीलवाड़ा के उद्योगपतियों और विभिन्न संगठनों की ओर से लिए गए फैसले को मजदूर विरोधी बताते हुए इसकी आलोचना की है।

श्री जाट ने रविवार को यहां कहा कि उद्योग और व्यापार की प्रगति जरूरी है, लेकिन विकास के नाम पर मजदूरों के हितों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। भीलवाड़ा की औद्योगिक व्यवस्था में हजारों श्रमिकों का महत्वपूर्ण योगदान है। उद्योगों को खड़ा करने और उत्पादन व्यवस्था को आगे बढ़ाने में मजदूर दिन-रात मेहनत करते हैं। ऐसे में उनके हितों से जुड़े किसी भी फैसले पर एकतरफा निर्णय लेना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि उद्योगपति और संगठन अपने स्तर पर फैसले लेते हैं, लेकिन किसी भी निर्णय का सीधा असर मजदूरों की रोजी-रोटी और उनके अधिकारों पर पड़ता है तो उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

श्री जाट ने कहा कि मजदूर केवल उद्योगों में काम करने वाला कर्मचारी नहीं, बल्कि पूरे औद्योगिक ढांचे की महत्वपूर्ण कड़ी है। श्रमिकों की मेहनत से उत्पादन होता है और उसी से उद्योगों का कारोबार आगे बढ़ता है। इसलिए उद्योगों से जुड़े फैसलों में मजदूरों के हित और उनकी समस्याओं को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

उन्होंने उद्योगपतियों और संगठनों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोई फैसला मजदूरों को प्रभावित करता है तो उससे पहले श्रमिकों और उनके प्रतिनिधियों से बातचीत होनी चाहिए। संवाद के जरिए रास्ता निकाला जा सकता है, लेकिन एकतरफा तरीके से लिए गए फैसले से श्रमिकों में असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है।

श्री जाट ने कहा कि भीलवाड़ा की पहचान उद्योग और मेहनतकश वर्ग दोनों से जुड़ी हुई है। शहर के औद्योगिक विकास के साथ श्रमिकों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

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