केंद्रपाड़ा , जुलाई 10 -- मॉनसून की शुरुआत के साथ ही भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित माथा-आडिहा, दुर्गाप्रसाद दिया और लक्ष्मीप्रसाद दिया पक्षी विहारों में हजारों की संख्या में औपनिवेशिक पक्षी पहुंचने लगे हैं। इसके साथ ही यहां पक्षियों के सालाना घोंसला बनाने और प्रजनन के मौसम की शुरुआत हो गयी है।

कनिका वन क्षेत्र के सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) मानस कुमार दास ने बताया कि इन तीन पक्षी विहारों में लगभग 30 हजार पक्षी पहले ही पहुंच चुके हैं।

आमतौर पर मॉनसून या आवासीय औपनिवेशिक पक्षी के रूप में पहचाने जाने वाले इन पक्षियों में एशियन ओपनबिल स्टॉर्क (घोंघिल), ब्लैक-हेडेड आईबिस (काली गर्दन वाला बाजा), पर्पल हेरोन (बैंगनी बगुला), ग्रे हेरोन (धूसर बगुला), पोंड हेरोन (अंधा बगुला) और लिटिल कोरमोरेंट (छोटा पनकौआ) शामिल हैं।

यहां के घने मैंग्रोव एवं उद्यान का शांत, प्रदूषण मुक्त वातावरण पक्षियों को रहने के लिए बेहतर जगह देते हैं, जो हर मॉनसून में घोंसले बनाने और प्रजनन के लिए हजारों पंख वाले मेहमानों को आकर्षित करता है।

हर साल बरसात के मौसम में भीतरकनिका में 11 प्रजातियों के पक्षी इकट्ठा होते हैं। इनमें एशियन ओपनबिल स्टॉर्क, लिटिल कोरमोरेंट, इंटरमीडिएट एग्रेट, ग्रेट एग्रेट, लिटिल एग्रेट, पर्पल हेरोन, ग्रे हेरोन, नाइट हेरोन, डार्टर (पनवा), ब्लैक-हेडेड आईबिस और कैटल एग्रेट शामिल हैं।

ये पक्षी गुआन, सुंदरी, सिंदुका, बानी, जगुला, केरुअन और ओरूअन जैसी मैंग्रोव वृक्ष प्रजातियों पर अपने घोंसले बनाते हैं, जो घोंसला बनाने के लिए अनुकूल परिस्थितियां प्रदान करती हैं।

पिछले कई वर्षों से माथा-आडिहा, लक्ष्मीप्रसाद दिया और दुर्गाप्रसाद दिया पक्षी विहार इन पक्षियों के पसंदीदा घोंसले और प्रजनन स्थल बने हुए हैं। पक्षियों ने हालांकि एक बार फिर बगागहन पक्षी विहार से दूरी बना ली है, जिसे कभी मॉनसून पक्षी प्रजातियों के लिए स्वर्ग माना जाता था।

राजनगर मैंग्रोव और वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) वरदराज गांवकर के अनुसार, पिछली पक्षी गणना में भीतरकनिका के पक्षी विहारों में 10 प्रजातियों के अनुमानित 1,30,796 पक्षी दर्ज किये गये थे।

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