मुंबई , अक्टूबर 17 -- महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक रईस शेख ने आरोप लगाया है कि राज्य के भिवंडी पूर्व निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूची से 49 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जबकि लगभग 12,000 और मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई थी।

श्री शेख ने मुंबई मराठी पत्रकार संघ के एक संवाददाता सम्मेलन में सभी पात्र मतदाताओं के नाम वापस जोड़ने, अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।

श्री शेख ने अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज और अन्य सबूत पेश किए। उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद उन कई मतदाताओं के घरों का दौरा किया, जिनके नाम हटा दिए गए थे और पाया कि वे अभी भी अपने पंजीकृत पतों पर ही रह रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इसके विपरीत बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मतदाता या तो घर पर नहीं मिले या कहीं और चले गए हैं। विधायक ने दो ऐसे मतदाताओं को भी पेश किया, जिनके बारे में उन्होंने दावा किया कि उनके नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटा दिए गए थे।

श्री शेख ने बताया कि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सबूतों के साथ एक लिखित शिकायत सौंपी थी लेकिन उनका आरोप है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

विधायक के अनुसार इस मुद्दे के सामने आने के बाद 540 आपत्तियां दर्ज की गईं, जिनमें से लगभग 500 मुस्लिम मतदाताओं से जुड़ी थीं। उन्होंने इन आंकड़ों पर चिंता जताई और आरोप लगाया कि इस समुदाय के लोगों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।

श्री शेख ने यह भी दावा किया कि सरकार द्वारा नियुक्त बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) फॉर्म की जांच कर रहे थे और मतदाताओं के नाम हटाने की मांग कर रहे थे, जबकि बीएलओ अपना काम कर रहे थे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में काम करने के आरोपी बीएलओ को हटाने और उनकी भूमिका की जांच कराने की मांग की।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नाम हटाने की यह प्रक्रिया एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थी, जिसका मकसद इस निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार को फायदा पहुंचाना था।

विधायक ने मांग की कि चुनाव आयोग पात्र मतदाताओं के नाम वापस जुड़वाना सुनिश्चित करे और इस मामले की पारदर्शी जांच कराए। उन्होंने अनियमितताओं के खिलाफ इंडिया गठबंधन के अभियान का समर्थन किया और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को रद्द करने की मांग का भी समर्थन किया।

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