दुर्ग , अगस्त 09 -- छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित भिलाई टाउनशिप में सेल प्रबंधन की प्रस्तावित आवास नीति में संभावित बदलाव और रिटेंशन प्रावधान खत्म होने की आशंका के विरोध में शनिवार देर शाम बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारियों, युवाओं और स्थानीय नागरिकों ने प्रदर्शन किया। 'भिलाई को बचाना है' मुहिम के तहत 500 से अधिक लोग सड़क पर उतरे। इस दौरान भिलाई स्टील प्लांट के मेन गेट की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झूमाझटकी भी हुई।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस्पात मंत्रालय को भेजे गए डीपीआर में रिटेंशन का प्रावधान नहीं होने से टाउनशिप में वर्षों से रह रहे सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने आवास को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। टाउनशिप में लाइसेंस आवास, लीज रजिस्ट्रेशन और रेंट रिटेंशन स्कीम को लेकर पहले से ही असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अनुसार, उन्होंने भिलाई स्टील प्लांट में वर्षों तक सेवा दी है और टाउनशिप के विकास तथा रखरखाव में रिटेंशन धारकों की भी लंबे समय से भूमिका रही है। ऐसे में आवास नीति में बदलाव करते समय उनके हितों और वर्षों की सेवा को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

कार्मिकों ने आरोप लगाया कि मोनेटाइजेशन नीति के तहत रिटेंशन व्यवस्था समाप्त किए जाने की आशंका है। उनका कहना है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों से 10 लाख रुपए तक सुरक्षा जमा और किराए के 32 गुना तक राशि लेने के बावजूद 24 रुपए प्रति वर्गफुट किराया लेने की तैयारी की जा रही है।

प्रदर्शनकारियों ने लाइसेंस वाले मकानों पर लगातार दिए जा रहे नोटिस और लीज वाले मकानों के रजिस्ट्रेशन में अपेक्षित प्रगति नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। स्थानीय नागरिकों के बीच टाउनशिप के बड़े हिस्से को खाली कराने तथा भविष्य में जमीन निजी संस्थाओं या बिल्डरों को सौंपे जाने की चर्चाएं भी हैं। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लगातार जारी नोटिसों के चलते 10 हजार से ज्यादा परिवारों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

प्रदर्शन के दौरान 'भिलाई को बचाना है' के नारे के साथ भिलाई सत्याग्रह के बैनर तले युवा कांग्रेस और स्थानीय नागरिकों ने सेक्टर-1 स्थित मुर्गा चौक से भिलाई स्टील प्लांट के मेन गेट तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने आवास खाली करने के नोटिस, मकानों के आवंटन, लाइसेंस, लीज रजिस्ट्रेशन और रिटेंशन पॉलिसी में बदलाव का विरोध किया। इस दौरान बीएसपी के कथित निजीकरण को लेकर भी नारेबाजी की गई।

प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने बीएसपी मेन गेट के आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। करीब 200 पुलिसकर्मियों और 150 सीआईएसएफ जवानों को तैनात किया गया था। मेन गेट की ओर जाने वाले रास्ते पर तीन लेयर की बैरिकेडिंग की गई थी।

प्रदर्शनकारी पहले बैरिकेड तक पहुंचे और आगे बढ़ने लगे। दूसरे बैरिकेड के पास पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस ने शांतिपूर्वक धरना-प्रदर्शन करने का अनुरोध किया, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कुछ युवा पेड़ों पर चढ़ गए, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पोस्टर फेंके और कई लोगों ने बैरिकेड पर चढ़कर उसे पार करने का प्रयास किया।

मेन गेट की ओर जाने से रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच करीब एक घंटे तक झूमाझटकी की स्थिति बनी रही। पुलिस बल प्रदर्शनकारियों को लगातार आगे बढ़ने से रोकता रहा।

प्रदर्शन में शामिल भिलाई विधायक देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि भिलाई की बसाहट को खत्म करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से आवासों को नोटिस दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 10 हजार से अधिक आवासों को खाली कराकर जमीन किसी निजी संस्था को देने की योजना के खिलाफ वे और भिलाई की जनता खड़ी है।

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