भिण्ड , अगस्त 25 -- मध्यप्रदेश के भिण्ड वन विभाग में एसडीओ रामकुमार और अटेर रेंजर कृतिका शुक्ला के बीच कथित विवाद की शिकायतों के बाद विभागीय जांच शुरू हो गई है। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाए गए हैं। इसी बीच लकड़ी परिवहन के लिए जारी होने वाली टीपी (ट्रांजिट परमिट) की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए डीएफओ बीआर सिराम ने ऑफलाइन टीपी जारी करने पर रोक लगा दी है। अब सभी टीपी ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से जारी की जाएंगी।

मामला सात अगस्त को भिण्ड जिले के गोरमी क्षेत्र में आयोजित जन शिकायत निवारण शिविर के बाद सामने आया था। बताया गया कि शिविर के दौरान एसडीओ रामकुमार की ओर से अटेर रेंजर कृतिका शुक्ला पर धमकी देने और महिला उत्पीड़न के मामले में फंसाने की बात कहने के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, शिकायत शिविर के चार दिन बाद 11 अगस्त को की गई थी।

एसडीओ की शिकायत में विभाग के चार अन्य कर्मचारियों के नामों का भी उल्लेख किया गया है। वहीं, अटेर रेंजर कृतिका शुक्ला की ओर से भी एसडीओ पर दबाव बनाने और एससी-एसटी की धाराओं में फंसाने की धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं। दोनों पक्षों की शिकायतों के बाद डीएफओ स्तर पर मामले की जांच शुरू की गई है।

इसी बीच विभागीय स्तर पर यह बात सामने आई कि विवाद की एक कड़ी लकड़ी परिवहन के लिए जारी होने वाली टीपी से भी जुड़ी हो सकती है। हालांकि, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। मामले को संज्ञान में लेते हुए डीएफओ बीआर सिराम ने सभी संबंधित अधिकारियों को ऑफलाइन टीपी जारी नहीं करने के निर्देश दिए हैं।

अब लकड़ी परिवहन से संबंधित सभी टीपी ऑनलाइन दर्ज करने के बाद ही परमिट की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। विभाग का मानना है कि ऑनलाइन व्यवस्था से टीपी जारी करने में पारदर्शिता आएगी और रिकॉर्ड भी व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध रहेगा।

डीएफओ बीआर सिराम ने बताया कि एसडीओ और रेंजर से जुड़े मामले की जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद निष्कर्ष वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि लकड़ी परिवहन की टीपी की ऑफलाइन प्रक्रिया बंद कर ऑनलाइन व्यवस्था लागू कर दी गई है।

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