भिण्ड , फरवरी 01 -- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) कानून के विरोध में मध्य प्रदेश के भिण्ड में रविवार को प्रमुख बाजार पूरी तरह बंद रहे और यातायात व्यवस्था भी प्रभावित रही।
भिण्ड शहर में आज सुबह 12 से अधिक सवर्ण संगठनों के पदाधिकारी अलग-अलग बाजार क्षेत्रों में टोलियों के साथ निकले और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए यूजीसी कानून वापस लेने की मांग की। शहर के बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। मेडिकल और आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर लगभग सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। ई-रिक्शा, ऑटो और यात्री बसों का संचालन ठप रहा, जिससे आमजन को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले उपभोक्ता भी बाजार बंद होने की जानकारी मिलने पर वापस लौटते नजर आए।
सूत्रों ने बताया कि परशुराम सेना, हिंदू सेना, श्रीराम सेना, करणी सेना सहित अन्य सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी टोलियों में बाजार क्षेत्रों में पहुंचे, जिसके बाद पूरा शहर लगभग बंद की स्थिति में नजर आया। सदर बाजार, गोल मार्केट, बजरिया, सब्जी मंडी, पुस्तक बाजार, भूंता बाजार और बताशा बाजार में सबसे अधिक असर देखने को मिला, जहां एक भी दुकान नहीं खुली। हड़ताल को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट रहा। शहर के प्रमुख चौराहों और बाजार क्षेत्रों में पुलिस ने पेट्रोलिंग की और हड़ताल में शामिल संगठनों की गतिविधियों की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई। भिण्ड शहर के अलावा मेहगांव, गोहद, गोरमी, लहार, मिहोना और रौन क्षेत्रों में भी शांतिपूर्ण तरीके से बाजार बंद रहे। यूजीसी कानून के विरोध में व्यापारियों ने भी स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखे।
श्रीराम सेना के रिषेंन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा कि यह विरोध समाज में बढ़ती जातिगत असमानता के खिलाफ है। उनका कहना है कि यूजीसी कानून से सामाजिक विभाजन बढ़ेगा और अपराध में वृद्धि की आशंका है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित