मुंबई , अक्टूबर 27 -- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि समुद्री अर्थव्यवस्था में गहन संरचनात्मक सुधारों के आधार पर, देश अब वैश्विक समुद्री नक्शे पर एक शक्ति के रूप में उभर रहा है।
श्री शाह आज यहां आयोजित भारतीय समुद्री सप्ताह 2025 में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि देश की नौसैनिक ताकत और इसकी भौगोलिक स्थिति स्पष्ट है, क्योंकि देश की तटरेखा 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी है, जिसमें 13 तटीय राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश शामिल हैं, साथ ही देश के पास एक विशेष आर्थिक क्षेत्र भी है।
उन्होंने कहा , "यह शिखर सम्मेलन भारत के गेटवे ऑफ इंडिया को विश्व के गेटवे में बदलने के लिए विचार-मंथन और एक साथ आने का मंच होगा। आज भारतीय समुद्री शिखर सम्मेलन का यह क्षण देश का समुद्री क्षण है, जहां इस शिखर सम्मेलन के माध्यम से गेटवे ऑफ इंडिया को विश्व के गेटवे में बदलने के लिए विचार-मंथन किया जाएगा।"उन्होंने उल्लेख किया कि समुद्री शिखर सम्मेलन ने साबित कर दिया है कि पिछले एक दशक में, इस क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों के आधार पर, देश एक शक्तिशाली उभरती शक्ति के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि समुद्री व्यवसाय देश की अर्थव्यवस्था के समग्र सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बड़ा योगदान देता है।
श्री शाह ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन वैश्विक निवेशकों के लिए अवसर खोल रहा है, जबकि देश अपनी समुद्री स्थिति, लोकतांत्रिक स्थिरता और क्षमता के आधार पर इंडो-पैसिफिक और ग्लोबल साउथ के बीच एक सेतु की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने जोर दिया कि देश का समुद्री इतिहास बहुत पुराना है, और भारत के समुद्री इतिहास के ऐतिहासिक साक्ष्य 5,000 साल पुराने हैं। शिखर सम्मेलन में सौ से अधिक देशों से आए प्रतिनिधियों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि भारत की समुद्री परंपरा वैश्विक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता का केंद्र बिंदु बनी हुई है।
श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का समुद्री दृष्टिकोण तीन स्तंभों पर आधारित है, जिसमें सुरक्षा, स्थिरता और आत्मनिर्भरता शामिल हैं।
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