अलवर , फरवरी 07 -- केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि भारत विश्व में बाघ संरक्षण का एक सफल आदर्श बनकर उभरा है, लेकिन बढ़ते मानवीय दबाव, वन क्षेत्रों में अतिक्रमण, मानव-वन्यजीव संघर्ष और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर नवाचार और मजबूत समन्वय आवश्यक है।

वह यहां शनिवार को बाघ संरक्षण को और अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक एवं समन्वित बनाने के उद्देश्य से बाघ अभयारण्यों के क्षेत्रीय निदेशकों एवं मुख्य वन्यजीव संरक्षकों के सम्मेलन में लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बाघ अभयारण्य केवल बाघों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ हैं। जंगल, जल स्रोत, जैव विविधता और स्थानीय समुदाय सभी का संतुलन बनाए रखना ही संरक्षण की असली कुंजी है।

इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य देश के विभिन्न बाघ अभयारण्यों में संचालित संरक्षण गतिविधियों की समीक्षा करना, जमीनी स्तर पर आ रही चुनौतियों पर चर्चा करना और भविष्य की रणनीतियों को साझा करना था। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आए अधिकारियों ने अपने-अपने अनुभव साझा किए और बाघों की संख्या बढ़ाने, निगरानी तंत्र को मजबूत करने, तकनीक आधारित संरक्षण और स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

सम्मेलन के दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने, त्वरित मुआवजा व्यवस्था, पर्यावरण पर्यटन के जिम्मेदार विकास और फील्ड स्टाफ की क्षमता वृद्धि जैसे मुद्दों पर भी सहमति बनी।

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