बेंगलुरु , अक्टूबर 16 -- भारत शनिवार को पांचवें और आखिरी टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में एक शानदार शुरुआत को जीत में बदलने की क्षमता और उनके गेंदबाजों की विपक्षी टीम को मैच पर हावी होने से रोकने की काबिलियत पर सबकी नजरें रहेंगी। वहीं वेस्टइंडीज की नजर सरीज जीतने पर होगी भारत को जीत के लिए आक्रामक क्षमता की धार तेज करनी होगीसीरीज अभी 2-2 से बराबरी पर है, और हैदराबाद में खेले गए चौथे मैच ने भारत को सोचने पर मजबूर कर दिया है। वेस्टइंडीज की 24 रन से जीत सिर्फ यह नहीं दिखाती कि उन्होंने दूसरी टीम से अधिक रन बनाए, बल्कि यह भी बताती है कि आक्रामक क्रिकेट खेलने और लक्ष्य का पीछा करते हुए नियंत्रण खो देने के बीच कितना बारीक अंतर होता है। भारत ने 248 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए बेहतरीन इरादे के साथ शुरुआत की और पहले चार ओवरों में बिना कोई विकेट खोए 60 रन बना लिए। संजू सैमसन ने 23 गेंदों पर 56 रन बनाकर भारत को मुकाबले में मजबूती से बनाए रखा, लेकिन ओपनिंग साझेदारी टूटने के बाद उस लय को बनाए रखना मुश्किल हो गया। आखिर में, भारत 19.3 ओवरों में 223 रनों पर सिमट गया, जिससे वेस्टइंडीज को जीत मिली।

भारत के लिए सबक यह है कि उन्हें अपना आक्रामक अंदाज छोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसके साथ बेहतर सूझबूझ दिखाने की जरूरत है। जब लक्ष्य का पीछा करते हुए प्रति ओवर 12 से अधिक रनों की जरूरत हो, तो बाउंड्री लगाना जरूरी है। लेकिन साथ ही, यह समझना भी जरूरी है कि कब एक सिंगल या दो रन लेकर स्कोरबोर्ड को आगे बढ़ाया जा सकता है, ताकि दूसरे बल्लेबाज को अनावश्यक जोखिम में न डाला जाए।

तिलक वर्मा के 43 और नीतीश कुमार रेड्डी के 41 रनों ने कुछ संघर्ष जरूर दिखाया, लेकिन भारत को ऐसी कोई साझेदारी नहीं मिल सकी जो मैच को और आगे तक ले जा पाती। इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय, लगातार विकेट गिरना, स्कोरिंग की गति धीमी होने से कहीं अधिक नुकसानदेह साबित होता है।

दूसरी ओर, वेस्टइंडीज ने संयम और ताक़त का एक बेहतरीन तालमेल खोज लिया है। कप्तान शाई होप ने हैदराबाद में 50 गेंदों पर नाबाद 102 रन बनाए। सीरीज में यह उनका दूसरा नाबाद शतक था, जिसने उनके आक्रामक मध्यमक्रम के लिए एक मजबूत मंच तैयार कर दिया। शेरफेन रदरफोर्ड ने 26 गेंदों पर नाबाद 49 रन बनाए, जिससे वेस्टइंडीज की टीम 3 विकेट के नुकसान पर 247 रनों के एक मज़बूत स्कोर तक पहुंच गई। भारत के गेंदबाजों के लिए समस्या सिर्फ यह नहीं थी कि उन्होंने कितने रन दिए, बल्कि यह थी कि होप ने कितनी आसानी से पूरी पारी को अपनी मर्जी से चलाया। शानदार फॉर्म में चल रहे बल्लेबाज को रोकने के लिए सिर्फ फील्डिंग बदलना या यॉर्कर फेंकने की कोशिश करना काफी नहीं है; इसके लिए लगातार सटीक गेंदबाजी, गति में बदलाव और बल्लेबाज को आसानी से रन बनाने के मौके न देने की क्षमता की जरूरत होती है।

चौथे मैच में कीमो पॉल ने अनुशासन की अहमियत साबित की, जब उन्होंने 41 रन देकर 5 विकेट झटके। उनकी शानदार गेंदबाजी ने भारत की अच्छी शुरुआत को लगातार विकेट गिरने के सिलसिले में बदल दिया, जबकि गुडाकेश मोती ने भी अहम मौकों पर विकेट लेकर दबाव बनाए रखा।

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