जयपुर , अगस्त 09 -- ऑल इंडिया काजू एसोसिएशन (एआईसीए) के अध्यक्ष बोला राहुल कामथ ने कहा है कि केंद्र सरकार की मदद से काजू उत्पादन में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और वर्ष 2035 तक इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है।

श्री कामथ ने यह बात रविवार को जयपुर में आयोजित तीन दिवसीय 'तीसरे ऑल इंडिया काजू सम्मेलन' के समापन पर मीडिया से कही। उन्होंने बताया कि देश के प्रमुख 10 काजू उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, केरल, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, कर्नाटक, गोवा आदि में सालाना छह से सात लाख टन कच्चे काजू का उत्पादन होता है, जबकि देश में इसकी मांग लगभग 20 लाख टन है। इस वजह से हर वर्ष 12 से 13 लाख टन कच्चा काजू आयात करना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि देश में पैदावार बढ़ाने के लिए एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से संपर्क किया था। सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हुए इस वर्ष के बजट में काजू उत्पादन बढ़ाने और आत्मनिर्भरता लाने के लिए 350 करोड़ रुपये के पैकेज का प्रावधान किया है। इसके अलावा विश्व बैंक की मदद से लगभग पांच करोड़ रुपये की एक परियोजना भी शुरू की जा रही है, जिससे उत्पादन दोगुना करने के प्रयास किये जायेंगे।

श्री कामथ ने बताया कि काजू की खेती में राष्ट्रीय काजू अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी) की विकसित नयी हाइब्रिड किस्मों का उपयोग किया जायेगा। हाइब्रिड किस्मों से प्रति एकड़ पैदावार 300-400 किलो से बढ़कर दो टन तक पहुंच जाती है। इससे वर्ष 2030 के बाद उत्पादन में भारी वृद्धि की उम्मीद है और 2035 तक भारत आत्मनिर्भर हो सकता है।

उन्होंने कहा कि काजू के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए जयपुर में तीन दिवसीय 'काजू महोत्सव' आयोजित किया गया। एआईसीए और इवेनटेल ग्लोबल एडवाइजरी के 'एपीडा' के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में देशभर से काजू उद्योग के 845 से अधिक प्रतिनिधियों और 1,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया। इसमें 100 से अधिक प्रदर्शकों ने नवीनतम तकनीकों और समाधानों का प्रदर्शन किया, जबकि 10 नयी मशीनरी टेक्नोलॉजी का लाइव प्रदर्शन भी किया गया।

इस वर्ष पहली बार बी2सी पहल के तहत एनडीएफसीआई के सहयोग से काजू महोत्सव का आयोजन हुआ, जिसमें बने 'एक्सपीरियंस जोन' के जरिये उपभोक्ताओं को काजू के पोषण, वैज्ञानिक तथ्यों और स्वास्थ्य लाभों से रूबरू कराया गया।

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