नई दिल्ली , मई 19 -- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा है कि यूरोपीय संघ और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का सम्पन्न होना यदि "आर्थिक कूटनीति का एक दुर्लभ क्षण" था तो उसे भारतीय निर्यातकों, निवेशकों और रोज़गार पैदा करने वालों के लिए फ़ायदे मंद व्यवस्था में बदलना एक पहाड़ चढने के समान है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन ने उद्योग मंडल फिक्की और सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ के सहयोग से भारत -ईयू एफटीए से लाभ उठाने के विषय पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, "हमने बातचीत का पहाड़ चढ़ लिया है, अब इससे भी बड़ी चढ़ाई शुरू होती है - इसे भारत और यूरोप भर में हर निर्यातक, हर निवेशक और हर रोज़गार पैदा करने वाले के लिए ज़मीनी स्तर पर कारगर बनाना है।"श्री जैन इस समझौते के संबंध में भारत के मुख्य वार्ताकार हैं। इस समझौते की घोषणा गत जनवरी में की गयी थी। इसके तहत भारत के लगभग 99.5 प्रतिशत निर्यात को यूरोपीय संघ के बार में कम या शून्य शुल्क पर प्रवेश का लाभ मिलेगा। भारत से कपड़े, वस्त्र, चमड़ा, जूते और रत्न व आभूषणों पर यूरोप में शुल्क की पूर्व समाप्ति का लाभ मिलेगा जबकि इन पर वर्तमान में वहां 10-14 प्रतिशत (और कुछ श्रेणियों में 26 प्रतिशत तक) उच्च शुल्क लगता है। भारत ऐसे 33 अरब डॉलर मूल्य के श्रम-प्रधान सामान का यूरोपीय संघ के बाजार में निर्यात करता है।
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