भदोही , जनवरी 27 -- कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) ने भारत-यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के लिए ऐतिहासिक और निर्णायक क्षण करार देते हुए इसका स्वागत किया है।
सीईपीसी के अध्यक्ष कैप्टन मुकेश कुमार गोम्बर ने मंगलवार को जारी विज्ञप्ति में कहा कि यह समझौता हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के लिए परिवर्तनकारी उपलब्धि है। शुल्कों के उन्मूलन से यूरोप जैसे व्यापक और परिष्कृत बाजारों तक भारतीय कालीनों की पहुंच मजबूत होगी, जिससे मूल्य, गुणवत्ता और स्थिरता के आधार पर प्रतिस्पर्धा और प्रभावी हो सकेगी। उन्होंने कहा कि इसका सीधा लाभ भदोही, मिर्ज़ापुर, वाराणसी और श्रीनगर जैसे प्रमुख कालीन क्लस्टरों में कार्यरत कारीगरों तथा सूक्ष्म एवं लघु निर्यातकों को मिलेगा।
परिषद के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए से हस्तनिर्मित कालीनों के निर्यात की संभावनाएं सुदृढ़ होंगी, बेहतर मूल्य प्राप्ति संभव होगी और यूरोपीय खरीदारों के साथ दीर्घकालिक साझेदारियां विकसित होंगी। इससे भारत उच्च गुणवत्ता वाले हस्तनिर्मित कालीनों के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता तथा सतत एवं नैतिक सोर्सिंग के साझेदार के रूप में और मजबूत होगा।
सीईपीसी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व और 'विकसित भारत' की परिकल्पना के तहत वैश्विक व्यापार साझेदारियों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता के परिणामस्वरूप यह ऐतिहासिक समझौता संभव हो सका।
परिषद के अनुसार, इस समझौते से भदोही, मिर्ज़ापुर, वाराणसी (उत्तर प्रदेश), पानीपत (हरियाणा), जयपुर व बीकानेर (राजस्थान) तथा श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) जैसे कालीन उत्पादन क्लस्टरों को वैश्विक बाजार में नई मजबूती मिलेगी। एफटीए के अंतर्गत कालीन उत्पादों को प्राप्त अधिमान्य बाजार पहुंच से यूरोपीय संघ में भारतीय कालीनों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
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